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अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति बने हिब्तुल्लाह अखुंदजादा, क्रूर कमांडर है हिब्तुल्लाह

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NEWS DESK, NATION EXPRESS, काबुल

तालिबान ने राजधानी काबुल समेत लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। राष्ट्रपति अशरफ गनी और उप राष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने देश छोड़ दिया है। तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जे के बाद हिब्तुल्लाह अखुंदजादा को अमीर अल मोमिनीन, यानी अफगानिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। अरबी में हिब्तुल्लाह का मतलब होता है ईश्वर का तोहफा। अपने नाम के उलट हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ऐसा क्रूर कमांडर है जिसने कातिलों और अवैध संबंध रखने वालों की हत्या करवा दी और चोरी करने वालों के हाथ काटने की सजा दी। हिब्तुल्लाह अखुंदजादा के जिंदगी की पूरी कहानी पढ़िए नेशन एक्सप्रेस की पढ़िए नेशन एक्सप्रेस की विशेष संवाददाता सिमरन की खास रिपोर्ट में !

पिता मस्जिद के इमाम थे, उन्हीं से मिली तालीम

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Taliban Leaders Of Afghanistan: All You Need To Know About Leaders Of  Taliban That Gained Power In Afghanistan - US को 'हराया', अशरफ गनी को  'खदेड़ा'...तालिबान की इस जीत के पीछे हैंहिब्तुल्लाह अखुंदजादा 1961 के आस-पास अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के पंजवई जिले में पैदा हुआ। वह नूरजई कबीले से ताल्लुक रखता है। उसके पिता मुल्ला मोहम्मद अखुंद एक धार्मिक स्कॉलर थे। वो गांव की मस्जिद के इमाम थे। उनके पास न तो जमीन थी, न कोई संपत्ति। मस्जिद में मिलने वाले दान के पैसों और अनाज से घर चलता था। हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ने अपने पिता से ही तालीम हासिल की।

सोवियत सेना के अतिक्रमण के बाद उठा लिए हथियार

1980 के शुरुआती दिनों की बात है। अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन की सेना आ चुकी थी। उसी के संरक्षण में अफगान सरकार चल रही थी। कई मुजाहिदीन सेना और सरकार के खिलाफ लड़ रहे थे। इन मुजाहिदीनों को अमेरिका और पाकिस्तान से मदद मिलती थी। हिब्तुल्लाह अखुंदजादा का परिवार पाकिस्तान के क्वेटा चला गया और उसने हथियार उठा लिए।

Taliban's Mullah Baradar Likely To Be Next Afghanistan President; Here's  What We Know So Far1989 तक सोवियत यूनियन ने अपनी सेना वापस बुला ली। इसके खिलाफ लड़ने वाले लड़ाके अब आपस में ही लड़ने लगे। ऐसा ही एक लड़ाका मुल्ला मोहम्मद उमर था। उसने कुछ पश्तून युवाओं को साथ लेकर तालिबान आंदोलन शुरू किया। उसमें हिब्तुल्लाह अखुंदजादा भी शामिल हो गया।

अखुंदजादा के मदरसे में पढ़ते थे 1 लाख से ज्यादा तालिबान

1996 में जब तालिबान में काबुल पर कब्जा जमाया उस वक्त अखुंदजादा को फराह प्रांत के धार्मिक विभाग की जिम्मेदारी मिली। बाद में वो कंधार चला गया और एक मदरसे का मौलवी बन गया। ये मदरसा तालिबान फाउंडर मुल्ला उमर चलाता था जिसमें 1 लाख से ज्यादा स्टूडेंट पढ़ते थे।

1996 में अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन हो गया। हिब्तुल्लाह अखुंदजादा को इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान में शरिया अदालत का चीफ जस्टिस बनाया गया। चीफ जस्टिस रहते हुए अखुंदजादा ने सालों तक क्रूर सजा के आदेश दिए। जैसे- हत्यारों और अवैध संबंध रखने वालों की हत्या का आदेश और चोरी करने वालों के हाथ काट देना। वो फतवा जारी करने के लिए जाना जाता है। फतवों के मामले में मुल्ला उमर और मुल्ला मंसूर दोनों तालिबान चीफ अखुंदजादा से सलाह मशविरा करते थे।

2001 में अमेरिकी हमले के बावजूद डटा रहा

7 अक्टूबर 2001 को अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। सभी तालिबानी नेता तितर-बितर हो गए। कोई मारा गया, कोई पकड़ा और कोई पाकिस्तान भाग गया। इस दौरान हिब्तुल्लाह अखुंदजादा अफगानिस्तान में ही डटा रहा। माना जाता है कि इस दौरान उसने ज्यादा यात्राएं नहीं कीं।

2012 में हुई अखुंदजादा की हत्या की कोशिश

Mullah Omar Confidant, Taliban Co-founder & Probable Afghan President: Who  is Mullah Abdul Ghani Baradar?हिब्तुल्लाह अखुंदजादा के एक स्टूडेंट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया था कि 2012 में उसकी हत्या का प्रयास किया गया था। उस वक्त वो क्वेटा के एक मदरसे में पढ़ा रहा था। तभी एक स्टूडेंट ने खड़े होकर उसके ऊपर पिस्टल तान दी। अखुंदजादा की किस्मत अच्छी थी कि पिस्टल फंस गई और गोली नहीं चली।

मुल्ला मंसूर की मौत के बाद बना तालिबान का चीफ कमांडर

तालिबान के फाउंडर मुल्ला मोहम्मद उमर 2013 में बीमारी से मर गया। उसके बाद हकीमुल्लाह मसूद ने तालिबान की कमान संभाली, लेकिन 2013 ड्रोन अटैक में उसकी भी मौत हो गई। 2015 में तालिबान ने मुल्ला मंसूर को अपना नया नेता चुने जाने की घोषणा की। मई 2016 में ड्रोन हमले में मुल्ला मंसूर की भी मौत हो गई।

Taliban Leaders Of Afghanistan: All You Need To Know About Leaders Of  Taliban That Gained Power In Afghanistan - US को 'हराया', अशरफ गनी को  'खदेड़ा'...तालिबान की इस जीत के पीछे हैं25 मई 2016 को हिब्तुल्लाह अखुंदजादा को तालिबान की कमान सौंपी गई। माना जाता है कि मंसूर अपनी वसीयत में इसका नाम लिखा था। हिब्तुल्लाहह अखुंदजादा की नियुक्ति तालिबान के बड़े नेताओं ने पाकिस्तान के क्वेटा में की थी। हालांकि रहबरी शूरा, यानी तालिबान काउंसिल के सभी मेंबर्स वहां मौजूद नहीं थे। एक तबके को हिब्तुल्लाह अखुंदजादा के लीडर बनने से आपत्ति थी, लेकिन कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

अखुंदजादा के बेटे ने की सुसाइड बॉम्बिंग

तालिबान के प्रवक्ता यूसुफ अहमदी ने एक बयान में बताया था कि 20 जुलाई 2017 को हिब्तुल्लाह अखुंदजादा का बेटा अब्दुर्रहमान अफगान मिलिट्री बेस पर एक सुसाइड अटैक करते हुए मारा गया। अगस्त 2019 में अखुंदजादा का भाई हाफिज अहमदुल्लाह एक बम धमाके में मारा गया। बम धमकों में उसके परिवार के कई लोग मारे गए।

Report By :- SIMRAN SINGH,  विशेष संवाददाता, NEWS DESK, NATION EXPRESS, काबुल

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