चार साल में पांच बार ‘जला’ राजस्थान, कांग्रेस राज में साम्प्रदायिक हिंसा का गवाह बना राजस्थान, दंगे की आग बुझ चुकी है, लेकिन आगजनी का शिकार हुईं दुकानों और मकानों पर निशान अब भी बाकी हैं
NEWS DESK, NATION EXPRESS, राजस्थान

प्रदेश में कारौली हिंसा कोई पहली घटना नहीं है जिसने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारा बिगड़ा हो। इससे पहले भी राज्य के कई शहरों में नफरत की चिंगारी ऐसी भड़की कि आगजनी में तब्दील हो गई। अक्टूबर 2019 से राजस्थान नफरत की आग में पांच बार जल चुका है। यह हालात तब हैं जब कोरोना महामारी के कारण दो साल तक प्रदेश में सभी तरह के आयोजनों पर रोक थी।
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करौली हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बयानों में भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा था कि भाजपा अभी से इलेक्शन मोड में आ गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा प्रदेश दौरे पर आए हैं और अमित शाह अब आने वाले हैं। इस दौरान दंगों का होना और जगह जगह तनाव पैदा करना, ये तमाम बातें राजस्थान में इलेक्शन मोड की शुरुआत है। जेपी नड्डा के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ये आग लगाने के लिए आते हैं। पूरे देश में आग लगा रहे हैं, आए और आग लग गई। ये लोग रैलियां कराते हैं और धर्म के नाम पर भड़काने वाले नारे लगाते हैं, डीजे बजाते हैं जबकि यह सब गैरकानूनी है। करौली हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूपीए राज में हुए दंगों को भूला दिया है। केन्द्र में मोदी सरकार के आने से पहले भी राजस्थान में कई बार हिन्दू मुस्लिम दंगें हुए हैं। ऐसे में हिंसा की इस घटना को बीजेपी से जोड़कर कितना उचित है!

डूंगरपुर: उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर भड़की हिंसा, घरों और वाहनों में तोड़फोड़
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तत्कालीन चौरासी विधायक राजकुमार रोत भी धरने में शामिल हुए। हाईवे जाम की चेतावनी के बाद डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में युवा महापड़ाव स्थल पर पहुंचते रहे। 24 तारीख को युवाओं के सब्र का बांध टूट गया। इसी दिन दोपहर को युवाओं की भीड़ कांकरी डूंगरी पहाड़ी से उतरी और उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर हिंसा करने लगी। इस दौरान पथराव में 35 पुलिसकर्मी घायल हुए। घरों, होटलों और वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। तीन दिन बाद 27 सितंबर को हाईवे पर खुल सका।\