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झारखंड कैडर के IPS अधिकारियों का राज्य से हो रहा है मोहभंग ! आखिर Central Deputation क्यों चाहते हैं अधिकारी?

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SPECIAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

झारखंड में IAS और IPS अधिकारियों का काम में मन नहीं लग रहा है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्य को छोड़ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसा होने से वर्तमान में विभागों का दायित्व संभाल रहे अधिकारी अतिरिक्त प्रभार के बोझ तले दबते चले जा रहे हैं.

झारखंड कैडर के आईपीएस अधिकारियों का राज्य से मोहभंग हो रहा है. इसकी वजह से राज्य के आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं. बीते ढाई साल में झारखंड कैडर के नौ से अधिक आईपीएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गये. इनमें 2012 से लेकर 2019 बैच के आईपीएस शामिल हैं. हाल तो यह है कि झारखंड के कई आईपीएस, जो अभी किसी जिले में एसपी नहीं बने, वह भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं. इनमें के विजय शंकर, विनित कुमार, शुभांशू जैन जैसे आईपीएस अधिकारी शामिल है. झारखंड में वर्तमान में आईपीएस की संख्या बढ़कर 144 हो गयी है. इनमें 17 आईपीएस अंडर ट्रेनिंग हैं. जबकि 25 आईपीएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गये हैं.

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jharkhand police service officers promoted as ips

आईपीएस अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की प्रमुख वजह :

  • – एक ही अधिकारी के पास एक से ज्यादा विभाग की जिम्मेदारी.
  • – नियमित तौर पर ट्रांसफर पोस्टिंग नहीं होना.
  • – लंबे समय से शंटिंग में रहना
  • – करियर के लिए सेंट्रल डेपुटेशन पर जाना हर आईपीएस के लिए जरूरी
  • – झारखंड में काम करने का बेहतर माहौल नहीं मिलना.

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झारखंड कैडर के ये आईपीएस अधिकारी हैं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर

  • – एसएन प्रधान
  • – अजय भटनागर
  • – एम एस भाटिया
  • – संपत मीणा
  • – नवीन कुमार सिंह
  • – बलजीत सिंह
  • – आशीष बत्रा
  • – साकेत कुमार सिंह
  • – कुलदीप द्विवेदी
  • – अभिषेक
  • – अनूप टी मैथ्यू
  • – राकेश बंसल
  • – अनीश गुप्ता
  • – पी मुरुगन
  • – जया रॉय
  • – शिवानी तिवारी
  • – अखिलेश वॉरियर
  • – अंशुमन कुमार
  • – प्रशांत आनंद
  • – हरिलाल चौहान
  • – प्रियंका मीणा
  • – आर रामकुमार
  • – विनीत कुमार
  • – के विजय शंकर
  • – शुभांशु जैन

आईपीएस को एसडीपीओ के बाद सिटी या रूरल एसपी का नहीं दिया जा रहा कमान :

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रेगुलर आईपीएस अधिकारी का करियर ग्राफ फिक्स रहता है. लगभग एक डेढ़ साल एएसपी-एसडीपीओ रहने के बाद वो सिटी या रूरल एसपी का प्रभार संभालते हैं और फिर उनको जिला की जिम्मेवारी सौंपी जाती है. लेकिन वर्तमान में झारखंड में यह क्रम टूट गया है. आईपीएस को एसडीपीओ के बाद सिटी या रूरल एसपी का कमान नहीं दिया जा रहा है. उनको जिला का कमान भी नहीं मिल रहा है. इसके अलावा रांची में बेसिक फैसिलिटी का भी अभाव है. नये आईपीएस को घर मिलने से लेकर गाड़ी तक की असुविधा है. इस सब से एक नेगेटिव माहौल है. प्रमोटेड पदाधिकारी लगातार छोटे बड़े हर पोस्ट पर पदस्थापित हैं. एसपीएस के पदाधिकारी बाकी राज्य में पहले एडिशनल एसपी बनते हैं, फिर उन्हें आईपीएस में प्रोन्नति मिलती है. झारखंड में भी कई जिलों में एडिशनल एसपी अभियान का पोस्ट है, लेकिन वो खाली है.

Report By :- SHWETA JHA, SPECIAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

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