राष्ट्रगान जन गण मन से पहले गाया जाएगा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम ! सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई, सबका खड़ा होना अनिवार्य
NATIONAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI
सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बुधवार सुबह नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देश के तहत, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजना अनिवार्य होगा। सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समय होता है। लेकिन सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा।सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे। यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसकी मूल शक्ति के साथ वापस लाने की कोशिश है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के इन नए नियमों के तहत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजाया जाएगा। यानी पहले फिर ‘जन गण मन’। यह सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों में लागू होगा।
सरकारी आयोजनों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’
‘वंदे मातरम्’ अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी बजाया जाएगा। राष्ट्रपति के किसी भी कार्यक्रम में उनके आने-जाने के समय यह गीत बजना जरूरी होगा। राष्ट्रपति या राज्यपालों के आगमन, प्रस्थान, उनके भाषण से पहले और बाद में भी यह नियम लागू होगा। तिरंगा फहराने के मौके पर भी इसका पालन होगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब यह गीत बजाया या गाया जाएगा, तो मौजूद सभी लोग ध्यान मुद्रा में खड़े रहेंगे।
क्या हैं पूरे वंदे मातरम् के पूरे 6 छंद?
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में ‘वंदे मातरम्’ लिखा था, जो 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में छपा। इसमें कुल छह छंद हैं। शुरुआती छंद भारत को मां के रूप में चित्रित करते हैं। बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है। 1937 में कांग्रेस ने फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को अपनाया, क्योंकि कुछ मुस्लिम सदस्यों को देवियों के जिक्र से आपत्ति थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि पूरे छह छंद ही बजेंगे, जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबे होंगे।
कब बजाया जाएगा वंदे मातरम का आधिकारिक संस्करण?
मंत्रालय ने अपने आदेश को दिन चरणों में विभाजित किया है। पहला वे आयोजन जिनमें राष्ट्र्रगीत वंदे मातरम बजाया जाएगा, दूसरा वे आयोजन जिनमें राष्ट्रगीत बजाया और गाया जाएगा और तीसरा वे आयोजन जिनमें राष्ट्रगीत गाया या बजाया जा सकता है। नोट में कहा गया है नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोह, सरकार द्वारा आयोजित अन्य समारोहों में आगमन और उनके प्रस्थान के समय, राष्ट्रपति द्वारा अखिल भारतीय रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करने से ठीक पहले और बाद में, राज्यपाल/उपराज्यपाल का अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन और उनके प्रस्थान के समय, जब राष्ट्रीय ध्वज परेड में लाया जाता है, और कोई अन्य अवसर जिसके लिए भारत सरकार द्वारा विशेष आदेश जारी किए जाते हैं। इन अवसरों पर राष्ट्र गीत वंदे मातरम का आधिकारिक संस्करण बजाया जाएगा।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम
हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा। वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा
छंद 1
वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।सुखदां वरदां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 2
वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।अबला केन मा एत बले।बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।रिपुदलवारिणीं मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 3
वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म।तुमि हृदि, तुमि मर्म।त्वं हि प्राणाः शरीरे।बाहुते तुमि मा शक्ति।हृदये तुमि मा भक्ति।तोमारई प्रतिमा गडि।मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 4
वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।कमला कमलदलविहारिणी।वाणी विद्यादायिनी।नमामि त्वाम्।नमामि कमलां अमलां अतुलां।सुजलां सुफलां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 5
वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।धरणीं भरणीं मातरम्।शत्रु-दल-वारिणीं।मातरम्।।वन्दे मातरम्।।
छंद 6
वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।त्वं हि शक्ति मातरम्।वन्दे मातरम्।।
8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए
पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’ पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।’
वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?
सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है। उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।
22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।
Report By :- ANUJA AWASTHI, NATIONAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI
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