ANJUMAN ELECTION: बज गया चुनावी बिगुल, अध्यक्ष के लिए इबरार अहमद, असलम परवेज, और हाजी मुख्तार के बीच होगा त्रिकोणीय मुकाबला
NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
4 जून को चुनाव चिन्ह आवंटित
4 जून से 17 जून प्रचार प्रसार
19 जून को वोटिंग

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अंजुमन इस्लामिया रांची में फिर एक बार शाह और मात का खेल शुरू हो गया है। शाह और मात इसलिए कि इस पर आसिन होने के लिए इच्छुक व्यक्ति हर वह चीज करना चाहता है, जो सत्ता पाने का लोभी व्यक्ति करता है। यही कारण है कि इस पर काबिज होने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचे जाने लगे हैं। कोई किसी को कम नहीं आंक रहा है। समाजसेवा का जज्बा कूट-कूट कर बाहर आ रहा है। दरअसल, अंजुमन इस्लामिया रांची एक वक्फ संपित्त है और वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित है। इसकी देखरेख के लिए तीन वर्ष के लिए चुनाव के द्वारा प्रबंध समिति का चयन किया जाता है। लेकिन, यह अंजुमन का दुर्भाग्य रहा है कि जो भी यह चुनाव जीतकर आया, वह अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद भी यहां से नहीं जाना चाहता। संभवत: यही कारण है कि कई बार इस पर अवैध कब्जा करने की कोशिश भी कई लोगों द्वारा की गई है। वर्तमान परिस्थितियों की बात करें तो इस बार भी यह लड़ाई आर-पार होने वाली है। कोई षड्यंत्र करके सत्तारूढ़ होने के पक्षधर है तो कोई जनता के बीच जाकर निर्णायक लड़ाई लड़ने के पक्ष में है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो इस्लामिया की सारी बागडोर वक्फ बोर्ड के हाथों सौंपना चाहते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस शाह और मात के खेल में किसका बजेगा डंका और कौन किसे करेगा परास्त।
क्या है मामला
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
पहला गुट इबरार अहमद का है, जो दो टर्म तक अध्यक्ष रह चुके हैं। वह जनता के बीच अपने अच्छे काम को लेकर जायेंगे और फिर से सेवा करने का अवसर मांगेगे। हालांकि उनके विरोधियों ने उनके लिए अभी से जाल बिछा रखा है, जिसमें उनके फंसने की संभावना है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इबरार अहमद इस्लामिया के अब तक के अध्यक्ष में सबसे सफल रहे हैं लेकिन उन पर जातिगत पक्ष लेने के अरोप समेत कई आरोप भी लगे हैं। स्वयं उनके कार्यकाल के महासचिव मोख्तार अहमद ने अंजुमन अस्पताल में हुई वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरा गुट प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ असलम परवेज का है। कयास लगाये जा रहे हैं कि वह इस बार अंजुमन चुनाव अवश्य लड़ेंगे। हालांकि गत चुनाव में भी उनके उतरने की संभावना थी लेकिन किन्ही कारणों से वह पीछे रहे। इस बार उनके उतरने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो वह इबरार गुट के लिए मुसीबत बन सकते हैं क्योंकि डॉ असलम की शहर और देही इलाकों में अलग पहचान है। वह लोगों की मदद के लिए जाने जाते हैं।
तीसरा गुट हाजी मुख्तार का है हाजी मुख्तार को अंजुमन इस्लामिया में काम करने का लंबा अनुभव है क्योंकि इससे पहले हाजी मुख्तार इबरार अहमद गुट में महासचिव के पद पर काम कर चुके हैं अपने क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की आवश्यकता पर इन्होंने काफी सराहनीय कार्य कर दिखाया है। कोविड काल में संपूर्ण लॉकडाउन के समय हाजी मुख्तार द्वारा किये गये कार्य की आज भी मुस्लिम चौक-चौराहों पर सराहना की जाती है।
Report By :- SHADAB KHAN, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI