नेक पहल : ‘न निकाह पढ़ेंगे और न पढ़ने देंगे’, मौलवियों ने मुस्लिम समाज को चेताया, कहा- इस्लाम नहीं देता इजाज़त
NEWS DESK, NATION EXPRESS, CHATTISGARH
काजियों से डीजे और बैंड-बाजे वाला निकाह नहीं पढ़ाने का आह्वान किया है.मुस्लिम महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान खान ने बुधवार को एक लिखित बयान जारी कर काजियों से अपील की कि वे ऐसी शादियों में निकाह न पढ़ाएं जहां डीजे बज रहा हो या बैंड-बाजे के साथ बारात निकाली जा रही हो. उन्होंने बयान में कहा कि निकाह से पहले काजी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पक्ष द्वारा डीजे और बैंड-बाजा ना बजाया जाए.
कोरबा के मुस्लिम समुदाय ने शादी निकाह में बैंड-बाजा, डीजे, आतिशबाजी और फिजूलखर्ची को रोकने का बड़ा निर्णय लिया है. कोरबा सदर सुन्नी मुस्लिम जमात के हाजी अखलाक खान ने इस विषय पर बताया कि जिले के तंजिम उलेमा (मौलानाओं की कमेटी) ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है कि मुस्लिम समुदाय के शादी निकाह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए बैंड बाजा डीजे और पटाखों की आतिशबाजी को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा.
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तंजिम उलेमा की बैठक में कहा गया कि फरमान की अवहेलना करने पर जिले का कोई भी इमाम या उलेमा ऐसी शादी में निकाह पढ़ाने नहीं जाएगा और इसका विरोध किया जाएगा. इतना ही नहीं, उनके यहां बाहर से आए किसी उलेमा को निकाह पढ़ाने की इजाजत भी नहीं दी जाएगी. ना ही उस परिवार के द्वारा आयोजित किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में उलेमा शामिल होंगे. जिले के सभी मस्जिद कमेटियों और मदरसों की कमेटियों द्वारा इस फैसले का स्वागत किया गया है.
इस्लाम नहीं देता इजाज़त
इस विषय पर हाजी इकलाख खान ने कहा कि बैंड बाजा डीजे पर रोक लगाने के पीछे मकसद यह है कि इसके लिए इस्लाम इजाजत नहीं देता है. इस फैसले से जहां समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी वहीं समृद्ध परिवार के लोग ऐसा करने से बचेंगे.
तंजीमुल उलेमा के लिए गए फैसले में साफ कह दिया गया है कि उक्त शरिया कानून का अगर कोई भी व्यक्ति उल्लंघन करता है तो इमाम और उलेमा उनके यहां निकाह पढ़ाने नहीं जाएंगे. उनके यहां बाहर से आए किसी उलेमा को निकाह पढ़ाने की इजाजत भी नहीं दी जाएगी और ना ही उस परिवार के आयोजित किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में उलेमा शामिल होंगे.
मस्जिदों में किया जाएगा ऐलान
निर्णय के बाद इसका प्रचार प्रसार करने के लिए कमेटियों के पदाधिकारियों ने अपील की है कि सभी मस्जिदों में इसका ऐलान किया जाए. खासकर जुमे के दिन, ताकि अधिक से अधिक लोगों को फैसले के बारे में जानकारी हो सके.
Report By :- SHREYA YADAV, NEWS DESK, NATION EXPRESS, CHATTISGARH