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हे भगवान ! बेटी के जवान होते ही पिता बन जाता है दूल्हा ! अपनी ही औलाद से रचा लेता है शादी, मां हो जाती है सौतन

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NATIONAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI

Father Marries Daughter: इस प्रथा को लेकर मंडी समाज की दलील है कि यह परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का तरीका है.

दुनिया में जितने देश हैं, उससे कहीं ज्यादा अधिक परंपराएं हैं क्योंकि हर देश में कई समुदाय-जनजातियां होती हैं जिनकी अपनी परंपराएं और मान्यताएं हैं. दूसरे देश के लोगों को ये अजीबोगरीब लग सकती हैं पर जहां इनका पालन होता है, वहां के लिए ये खास होती हैं. हालांकि, कुछ परंपराएं कुप्रथा (Father Marry Daughter) नजर आती हैं. ऐसी ही एक कुप्रथा बांग्लादेश की मंडी जनजाति (Mandi tribe Bangladesh) के लोगों में होती है. यहां एक पिता, अपनी बेटी से शादी कर उसका पति बन सकता है. ये बेहद चौंकाने वाली परंपरा है.

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बेटी के जवान होते ही पिता बन जाता है पति! अपनी ही औलाद से रचा लेता है शादी, चौंकाने वाली है ये कुप्रथा - Father marry daughter tradition mandi tribe bangladesh men

रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश की मंडी जनजाति (Mandi tribe father daughter marriage) से जुड़ी एक परंपरा काफी चौंकाने वाली है और ये कुप्रथा के समान हो चुकी है. यहां अगर कोई मर्द, कम उम्र में किसी विधवा महिला से शादी करता है, तो ये तय हो जाता है कि आगे चलकर वो अपनी ही बेटी से शादी कर लेगा. पर वो अपनी और उस महिला से हुई बेटी से नहीं, बल्कि महिला की पहली शादी से हुई बेटी से शादी करता है जो रिश्ते में आदमी की सौतेली बेटी ही मानी जाएगी. इस वजह से इस मान्यता पर काफी सवाल उठते हैं और इसकी आलोचना भी होती है.

Father Marries Daughterबेटी का ही पति बन जाता है पिता
कम उम्र में जब बच्ची जिस व्यक्ति को अपना पिता मानती है, आगे चलकर उसी को अपना पति बना लेती है. इस कुप्रथा का कारण ये है कि जब कोई महिला कम उम्र में विधवा हो जाती है और उसकी बेटी रहती है, तो वो इसी शर्त पर किसी दूसरे मर्द से शादी करती है कि आगे चलकर उसकी बेटी भी उसी व्यक्ति कि पत्नी बनेगी और पत्नी होने का हर धर्म निभाएगी. इस नाते, सौतेला पिता, अपनी सौतेली बेटी का सिर्फ पति ही नहीं बनता, उसके साथ फिजिकल रिलेशन भी बना सकता है. हालांकि, असली पिता इस कुप्रथा में शामिल नहीं हो सकता है.

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माना जाता है कि ऐसा इस वजह से किया जाता है जिससे मां और बेटी का भविष्य सुरक्षित हो सके और मर्द, उनकी देखभाल कर सके. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भले ही ये कुप्रथा अब देश से क्षीण हो रही हो, पर आज भी इसका पालन किया जाता है. मैरी क्लेयर वेबसाइट ने साल 2015 में इस जनजाति की एक लड़की, ओरोला से इस कुप्रथा के बारे में बात की थी जिसका शिकार वो खुद थी. उसने बताया कि उसकी मां 25 साल की थी जब उसके पिता की मौत हो गई. वो अकेली मां बनकर नहीं रहना चाहती थी. तब 17 साल के नोटेन की शादी मिट्टामोनी (लड़की की 25 वर्षीय मां) से कर दी गई. इस शादी के साथ सिर्फ एक शर्त थी, कि वो ओरोला से भी शादी करेगा. जब मैरी क्लेयर की रिपोर्ट को 2015 में पब्लिश किया गया था, उस वक्त ओरोला, अपने पिता और पति की 3 बच्चों की मां बन चुकी थीं, वहीं उसकी मां, 2 बच्चों की मां थी. उनकी कहानी लोगों को काफी हैरान करती है.

मंडी समाज की दलील है कि यह परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का तरीका है

इस प्रथा को लेकर मंडी समाज की दलील है कि यह परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का तरीका है. उनका कहना है कि इससे विधवा महिला और उसकी बेटियों को आर्थिक और सामाजिक संरक्षण मिलता है, क्योंकि परिवार का भरण-पोषण उसी पुरुष द्वारा किया जाता है. लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है. इस परंपरा की आड़ में नाबालिग बच्चियों का शोषण होता है और उनका बचपन छीना जाता है. जिन बच्चियों को शिक्षा, प्यार और एक सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, उन्हें बालिग होने से पहले ही शादी और संबंधों के बोझ तले दबा दिया जाता है. यह रिवाज न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि समाज की सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

ऐसी प्रथाओं पर गंभीरता से सोचने और इन्हें खत्म करने की जरूरत है, ताकि किसी भी बच्ची को अपना बचपन खोने और असहनीय दर्द झेलने के लिए मजबूर न होना पड़े. इंसानियत के नाम पर ऐसी परंपराओं का कोई स्थान नहीं होना चाहिए.

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