बिगड़ते हालात : यूक्रेन में भारतीयों के हालात दर्दनाक, खाने तक के पैसे नही बर्फ पिघलाकर प्यास बुझा रहे भारतीय छात्र, भारतीयों छात्रों की दर्द भरी तस्वीर देख यकीनन आपकी आंखों में आसूं आ जायेंगे
NEWS DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI
प्यास बुझाने के लिए बर्फ के पिघलने का इंतजार कर रहे भारतीय छात्र
यूक्रेन में रूस के हमले के बीच भारतीय छात्रों के पास खत्म हुए पैसे, खाने को भी कुछ नहीं
यूक्रेन से भारतीय छात्रों ने NATION EXPRESS के साथ PHOTO शेयर किया है. इसमें दिख रहा है कि छात्रों पीने के पानी तक के लिए तरस गए हैं. वो लोग बर्फ को इकठ्ठा करके पीने का पानी का इंतजाम कर रहे हैं.
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रूस (Russia) के हमले के बाद यूक्रेन (Ukraine) में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. भारतीय छात्रों को यूक्रेन में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यूक्रेन से भारतीय छात्रों ने NATION EXPRESS के साथ PHOTO शेयर किया है. इसमें दिख रहा है कि छात्रों पीने के पानी तक के लिए तरस गए हैं. वो लोग बर्फ को इकठ्ठा करके पीने का पानी का इंतजाम कर रहे हैं. NATION EXPRESS लगातार यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को हो रही परेशानियों को दिखा रहा है.

NATION EXPRESS को इससे पहले छात्रों ने यूक्रेन से कई PHOTO भेजे है जिसमें वो बता रहें हैं, अभी तक उनका रेस्क्यू नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि वो भूखे प्यासे हैं. उनके पास टॉयलेट जाने तक पानी नहीं है. उन्होंने बताया कि यहां से खारकीव और कीव दूर है. उन्हें वहां पहुंचने में 4 से 5 घंटे लगेंगे. उन्होंने बताया कि उन्हें खारकीव और कीवी से हंगरी-पोलेंड बॉर्डर जाने में 10 से 12 घंटे लगेंगे और उनके पास कोई ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधा नहीं है. बता दें कि इससे पहले भी यूक्रेन के सूमी में फंसी भारतीय छात्रा सावित्री साही ने एडिटरजी के साथ बातचीत की थी. उन्होंने बताया कि सूमी में छात्रों के सामने खाने और स्वास्थ्य का संकट पैदा हो गया हैं. उन्होंने भारत सरकार से उन्हें बचाने की गुहार लगाई .




इसमें पावर प्लांट पूरी तरह ध्वस्त हो गया जिसके बाद से ही बिजली भी गुल है। इस स्थिति में छात्रों के सामने पीने के पानी की भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। अब तो छात्र बर्फ को पिघलाकर वही पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, कड़ाके की ठंड के बीच अलाव व हीटर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में खाने-पीने की सामग्रियों की किल्लत से लेकर ठंड तक का सामना करना पड़ा है। कुछ ऐसे ही खौफनाक अनुभव पटौदी के अंकित धनखड़ ने भी साझा किए।