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झारखंड हाईकोर्ट ने प्रथम जेपीएससी परीक्षा में दिव्यांग आरक्षण लेकर सुनवाई की जिसमें उन्होंन सख्त लहजे में कहा कि आइएएस अधिकारी खुद को मालिक न समझें. उन्होंने कहा कि यदि मालिक बनना है, तो त्यागपत्र दे
झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस कैलाश प्रसाद देव की अदालत ने प्रथम जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में दिव्यांग आरक्षण का लाभ देने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दाैरान आइएएस अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जतायी.
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अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई के दाैरान टिप्पणी की.टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्ष 2006 से यह मामला कोर्ट के समक्ष आ रहा है. सरकार के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है. जेपीएससी ने जवाब दायर कर दिया है, लेकिन सरकार की अोर से जवाब दायर नहीं किया गया. लगता है आइएएस अधिकारी अपने आप को मालिक समझने लगे हैं.

अधिकारी जनता के नाैकर हैं. वेतन लेते हैं. अधिकारी माइंडसेट बदलें. यदि मालिक बनना है, तो त्यागपत्र देकर व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. यहां आप पब्लिक के नाैकर हैं. नाैकर जैसा ही मंशा रखें. सरकारी अधिवक्ता के आग्रह करने के बाद अदालत ने मामले में कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव को एक अवसर प्रदान किया. जवाब दायर करने के लिए 24 घंटे का समय दिया.
मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी. इससे पूर्व जेपीएससी की अोर से अदालत को बताया गया कि शपथ पत्र दायर कर दिया गया है. प्रथम जेपीएससी परीक्षा की प्रक्रिया वर्ष 2006 में पूरी हो चुकी है. उसके बाद से कई बार परीक्षा का आयोजन किया जा चुका है. प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता समावेश भंजदेव ने पैरवी की. प्रार्थी रचना ने वर्ष 2006 में याचिका दायर कर दिव्यांग आरक्षण का लाभ देने की मांग की है.
Report By :- ADITI PANDIT, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI