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कौन से कानून में बदलाव हो रहा है आसान शब्दों में समझिए जो आपके लिए जानना बेहद ही जरूरी है : मॉब लिंचिंग और नाबालिग से रेप पर मौत की सजा, देशद्रोह कानून का खात्मा, लोकसभा में IPC, CrPC में बदलाव के लिए बिल पेश

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POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI

Code of Criminal Procedure: देश से बहुत जल्द अंग्रेजों के बनाए 3 बड़े कानून खत्म हो जाएंगे और उसकी जगह नए भारत के नए कानून ले लेंगे. पहला IPC, दूसरा CrPC और तीसरा इंडियन एविडेंस कोड (Indian Evidence Code), ये तीनों पुराने कानून खत्म हो जाएंगे और इनकी जगह भारत सरकार के बनाए तीन संशोधित कानून प्रभावी होंगे. जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. बता दें कि मोदी सरकार ने ब्रिटिश हुकूमत से चले आ रहे पुराने कानूनों में बड़ा बदलाव किया है. शुक्रवार को मौजूदा मानसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह ने भारतीय दंड विधान को लेकर 3 नए विधेयक पेश किए. इन बिल के जरिए अमित शाह ने गुलामी के सभी निशानों को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया. पहले आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि गृहमंत्री ने कौन से 3 नए बिल पेश किए हैं.

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IPC की 175 धाराओं में होगा बदलाव

जान लें कि अब भारतीय न्याय संहिता 2023, Indian Penal Code यानी IPC 1860 की जगह लेगा. Criminal Procedure Code यानी CrPC 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता होगा तो वहीं Indian Evidence Code 1872 को भारतीय साक्ष्य विधेयक रिप्लेस करेगा. अब आपको बताते हैं कि IPC, CrPC और Indian Evidence Code में मोदी सरकार ने क्या-क्या बदलाव किए हैं. IPC की जगह लेने वाले प्रस्तावित भारतीय न्याय संहिता, 2023 में कुल 356 धाराएं होंगी. पहले इसमें 511 धाराएं होती थीं. मौजूदा IPC की 22 धाराओं को खत्म किया जाएगा. मौजूदा IPC की 175 धाराओं में बदलाव किए जाएंगे और ऐसी 8 धाराएं जोड़ी जाएंगी जो मौजूदा IPC में नहीं हैं.

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होने जा रहे हैं ये 15 अहम बदलाव

CrPC की जगह आने वाले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में कुल 533 धाराएं होंगी. मौजूदा CrPC की 9 धाराओं को खत्म किया जाएगा. CrPC की 160 धाराओं में बदलाव किए जाएंगे. साथ ही 9 नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. वहीं, मौजूदा Indian Evidence Code की जगह आने वाले भारतीय साक्ष्य बिल में 170 धाराएं होंगी तो 23 धाराओं में बदलाव होगा और एक नई धारा जोड़ी जाएंगी. इतना ही नहीं इनकी जगह लेने वाले कानूनों में कई बड़े बदलाव भी प्रस्तावित हैं जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आपको बताते हैं.

1- जिन मामलों में 7 साल या उससे ज्यादा की सजा है, उस मामले में Crime Scene पर Forensic Team का जाना जरूरी होगा.

2- यौन हिंसा के मामले में पीड़िता के बयान की Video Recording अनिवार्य होगी.

3- 7 साल से ज्यादा की सजा वाले केस को खत्म करना है तो पीड़ित को सुने बगैर केस वापस नहीं होगा.

4- किसी भी मामले में 90 दिन के अंदर Chargesheet फाइल करनी पड़ेगी.

5- किसी मामले में बहस पूरी होने के बाद एक महीने के भीतर कोर्ट को फैसला सुनाना होगा.

6- पुलिस अधिकारियों के खिलाफ Trial चलाने का फैसला सरकार को 120 दिन में करना होगा.

7- Mob Lynching के मामले में दोषियों को 7 साल की सजा, आजीवन कारावास या मौत की सजा भी हो सकती है.

8- Gang Rape के सभी मामलों में 20 साल की सजा या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान होगा.

9- 18 साल से कम उम्र की लड़की से गैंगरेप के केस में मौत की सजा का प्रावधान होगा.

10- मौत की सजा को सिर्फ आजीवन कारावास में ही बदला जा सकेगा.

11- दोषसिद्धि के बाद 30 दिन के भीतर सजा सुनाना जरूरी होगा.

12- पहली बार सजा के तौर पर Community Service की शुरुआत होगी.

13- FIR से लेकर केस डायरी और चार्जशीट से लेकर जजमेंट, हर चीज को Digitised किया जाएगा.

14- चुनाव के दौरान वोटर को रिश्वत देने पर 1 साल की सजा होगी.

15- छोटे अपराध करने पर कम्युनिटी सर्विस की सजा का प्रावधान होगा.

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स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाएगा बिल

गौरतलब है कि अभी इन तीनों बिल को लोकसभा में पेश किया गया है. जिसके बाद अब इन्हें संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाएगा. सरकार ने इन तीनों बिलों के जरिए जो सबसे बड़ा बदलाव किया वो राजद्रोह को खत्म करना है. प्रस्तावित भारतीय न्याय संहिता 2023 में अब IPC की धारा-124 A को भी खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह भारतीय न्याय संहिता, 2023 में नई धारा 150 जोड़ी है जिसमें बताया गया है कि अगर कोई जानबूझकर या सुनियोजित तरीके से, बोलकर, लिखकर, संकेत, ऑनलाइन या वित्तीय साधनों के जरिए अलगाव या सशस्त्र विद्रोह में शामिल होता है या इसे बढ़ावा देता है और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालता है या ऐसे अपराध में शामिल होता है तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा होगी.

भारतीय दंड विधान में ना सिर्फ बदलाव किए गए हैं बल्कि इनको और आधुनिक किए जाने का प्रयास किया जा रहा है. FIR से न्याय मिलने तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का प्रयास किया जा रहा है. साल 2027 तक सभी कोर्ट को डिजिटाइज करने की बात कही गई है. इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, SMS, ईमेल, वेबसाइट्स सभी की कानूनी वैधता होगी. सर्च और कुर्की में वीडियोग्राफी जरूरी होगी. जीरो  FIR कही से भी रजिस्टर करने का प्रावधान है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समन भी भेजे जा सकेंगे. 

Report By :- ANUJA AWASTHI / MADHURI SINGH, POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI

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