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आखिर क्या बला है यूनिफॉर्म सिविल कोड ? शादी, तलाक और जमीन जायदाद के मामलों में सभी धर्मों के लिए लागू होगा एक कानून

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NEWS DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI

Uniform Civil Code: दूसरी बार उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनते ही पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट मीटिंग बड़ा फैसला लिया. मुख्यमंत्री ने जनता से किया अपना वादा पूरा करते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक कमेटी बनाई है. जो यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करेगी. गुरूवार को राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और भाजपा ने चुनाव से पहले जनता से वादा किया था कि सरकार आने के बाद वो राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेंगे. हालांकि इस मुद्दे पर पहले भी कई बार बहस हुई है लेकिन हर बार कुछ नेता इस तरह मामलों पर अपनी सियासी रोटियां सेंकने के बाद ठंडे बस्तों में डाल देते हैं. अब ऐसे में अगर आपके मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह ये बला है क्या? जिसका नाम बार-बार खबरों में देखने और सुनने को मिलता है.

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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड को हिंदी भाषा में समान नागरिक संहिता कहा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि देश के हर शहरी के लिए एक जैसा कानून लागू हो. इसके तहत एक शहरी किसी भी धर्म-मज़हब से संबंध रखता हो, सभी के लिए एक ही कानून होगा. इसको धर्मनिर्पेक्ष कानून भी कहा जा सकता है. अब सोच रहे होंगे कि देश का कानून तो सभी के लिए बराबर है, तो हां आप सही सोच रहे लेकिन इसका मतलब विवाह, तलाक और जमीन जायदाद के मामलों में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून होगा.

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड? पुष्कर धामी ने उत्तराखंड में लागू करने के लिए बनाई कमेटीदेश के सिर्फ एक राज्य में लागू है यूनिफॉर्म सिविल कोड
अब तक आपने अलग-अलग राज्यों के अलावा केंद्र सरकार की तरफ से यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात सुनी होगी लेकिन इस पर आगे कोई अमल नहीं हो पाया है. देश का सिर्फ एक ही राज्य ऐसा है जहां पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है. उस राज्य का नाम है गोवा. इस राज्य में पुर्तगाल सरकार ने ही यूनिफार्म सिविल कोड लागू किया था. साल 1961 में गोवा सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के साथ ही बनी थी.

एक बार फिर चर्चा में आ गया यूनिफॉर्म सिविल कोड, जानें क्या है ये कानून -  the uniform civil code once again came under discussion know what is this  lawपर्सनल लॉ क्या होता है? | ( What is the Status of Personal Law):

ऐसे कानून को किसी धर्म, आस्था,समाज और संस्कृति के आधार पर एक निश्चित वर्ग या लोगों के समूह या किसी विशेष व्यक्ति पर लागू होता है। यह सभी धर्मो के अनुसार सबके अलग- अलग  रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। ये कानून उस धर्म के विभिन्नरतीय औपनिवेशिक काल से इन कानूनों का पालन कर रहे हैं। इस अध्याय में, तीन प्रकार के धर्म हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म के व्यक्तिगत कानूनों के बारे में जानेंगे।

हिंदू पर्सनल लॉ

हिन्दू विधि भाग 1 : जानिए हिन्दू विधि (Hindu Law) और हिंदू विवाह (Hindu  Marriage) से संबंधित आधारभूत बातें | Hindu Law and Hindu Marriageहिंदू पर्सनल लॉ में हिन्दुओ के रीती रिवाजो को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। और इनको वेदो और हिदू धर्म के नियमो को पालन करते हुए बनाया गया है

हिंदू पर्सनल लॉ वैधानिक कानून द्वारा मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत कानून और रीति-रिवाज हिंदुओं को नियंत्रित करते हैं। ये उत्तराधिकार, विवाह, गोद लेने, सह-पालन, पारिवारिक संपत्ति के विभाजन, अपने पिता के ऋणों का भुगतान करने के लिए बेटों के दायित्वों, संरक्षकता, रखरखाव और धार्मिक और धर्मार्थ दान से संबंधित कानूनी मुद्दों पर लागू होते हैं।

हिंदू पर्सनल लॉ के ऐसे 4 भाग हैं  जिनमें विधेयक का विभाजन किया गया है:

  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
  • हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956
  • द हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956
  • द हिंदू अडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956

मुस्लिम पर्सनल लॉ:

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट से अपील- 1991 के अधिनियम में  हस्तक्षेप न करें। Muslim Personal Law Board's appeal to the Supreme Court -  Do not interfere with the 1991यह पवित्र कुरान के अनुदेशों का पालन करते हुए इसका निर्माण किया गया है। भारतीय मुसलमानों के पर्सनल लॉ 1937 के शर्तिया कानून द्वारा शासित किए गए हैं।

मुस्लिम समुदाय के अंतर्गंत व्यक्तिगत कानून और रीति-रिवाज मुसलमानों पर शासन करते हैं। यह विरासत, वसीयत, उत्तराधिकारविवाह, वक्फ, दहेज, तलाक, , विरासत, उपहार, संरक्षकता और पूर्व-ग्रहण से संबंधित सभी मामलों पर लागू होता है।

  • इसके अलावा यहूदी और ईसाई अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित हैं।

चर्च में हुआ तलाक अवैध: सुप्रीम कोर्टक्रिश्चियन पर्सनल लॉ:

1972 के दौरान अधिनियमित ईसाई विवाह अधिनियम में विवाह के मामलों से संबंधित मामलों से निपटने के निर्देश हैं। 1869 के दौरान अधिनियमित भारतीय तलाक अधिनियम में तलाक से संबंधित मामले शामिल हैं।

क्रिश्चियन धर्म पर्सनल लॉ के धर्म के नियमों को पालन करते हुए बनायीं गयी है।

Uniform Civil Code - Benefits and Hassles in Adoptingयूनिफ़ॉर्म सिविल कोड से जुड़ी चुनौतियां:

इसमें बहुत से चुनौतियां है जिनको हम अलग अलग पॉइंट के द्वारा समझ सकते है।

संवैधानिक चुनौतियां:

अनुच्छेद एक दूसरे से जुड़कर अपनी निश्चित करते है। धर्म की स्वतंत्रता समानता के अधिकार का टकराव करती है।

  • अनुच्छेद 25 में धर्म के मौलिक अधिकार का उल्लेख है।
  • अधिकार अनुच्छेद 14 और 15 के तहत कानून के संरक्षण से पहले समानता के टकराव पैदा होते है
  • अनुच्छेद 26 (B) में कहा गया है कि प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय के अधिकार को धर्म के मामलों में अपने स्वयं के मुद्दों का पूर्ण तरीके से समझकर प्रबंधन करने का अधिकार है।

सामाजिक चुनौतियाँ:

  1. अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यको के अधिकारों का हनन होगा।
  2. सभी को एकरूपता लाने और अपनी-अपनी संस्कृति की रक्षा खुद को करनी होगी।
  3. इसका कार्यान्वयन सभी धर्मो में एकसमान करने में एक बड़ी चुनौती होगी।

Properties of Uniform Civil Code- यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के गुण:

  • एक समान और सरल कानून बनेगा
  • न्याय अच्छी होगी जिससे समय पर न्याय मिलेगा
  • धार्मिक कानूनों के माध्यम से महिलाओं के अधिकार माता-पिता के वचन के तहत सीमित हैं।
  • एक धर्मनिरपेक्ष समाज का गठन होगा जिससे निरपेक्ष और समाजवादी पैटर्न को प्राप्त करने के लिए धर्म से कानून को जोड़ने पर जोर देता है।

Report By :- FALAK MANSOORI / SARIKA TIWARI, NEWS DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI

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