रांची विवि की पूर्वं प्रतिकुलपति डॉ कामिनी कुमार पर 109 करोड़ के घोटाले के आरोप मे दर्ज हो सकती है FIR : रांची विवि प्रशासन ने डॉ कामिनी कुमार से 15 दिनों के अंदर वसूली करने का दिया आदेश
CITY DESK, NATION EXPRESS, रांची
राज्यपाल ने पकड़ी थी प्रभारी कुलपति कामिनी कुमार की धांधली, दिये थे जांच का आदेश
रांची विवि प्रशासन ने रांची विवि की पूर्वं प्रतिकुलपति (वर्तमान कोल्हान विवि) डॉ कामिनी कुमार का वेतनमान संशोधन सहित ली गयी अधिक राशि का एकमुश्त 15 दिनों के अंदर वसूली करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है. इसमें कहा गया है कि वेतन निर्धारण के विरुद्ध यदि किसी प्रकार की आपत्ति हो, तो अधिसूचना निर्गत होने की में कटौती का विरोध किया गया. प्रमाणित प्रति के साथ लिखित रूप से आपत्ति उचित माध्यम से भी करना होता है. ग्रीष्मावकाश में अग्रसारित करा कर विवि में जमा करें, ताकि उसे उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग को अग्रसारित किया जा सके.
- Advertisement -

रांची विवि में 109 करोड़ के घोटाले की जांच के आदेश दिये थे पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने :
घोटाले की जांच – राज्यपाल रमेश बैस ने रांची विश्वविद्यालय में 109 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के आदेश दिये थे. उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति को इस पूरे मामले की जांच के लिए जरूरी निर्देश दिये थे. साथ ही कहा है कि वे अनियमितताओं से संबंधित तथ्यों की गंभीरतापूर्वक समीक्षा करें और मामले में दोषी पदाधिकारियों-कर्मियों के विरुद्ध अविलंब प्राथमिकी दर्ज कराएं.
राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति . के समक्ष कुलपति, रांची विवि डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने तत्कालीन प्रभारी कुलपति, रांची विश्वविद्यालय, डॉ कामिनी कुमार के कार्यकाल में बरती गयी विभिन्न अनियमितताओं के संदर्भ में ध्यान आकृष्ट कराया. इस पर कुलाधिपति कार्यालय ने समीक्षा की। समीक्षा के बाद कुछ बिंदुओं पर प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया. उल्लेखनीय है कि इस मामले को लेकर राज्यपाल ने तटस्थ जांच के लिए डॉ कामिनी कुमार को प्रशासनिक दृष्टिकोण से रांची विश्वविद्यालय से प्रतिकुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा में स्थानांतरित कर दिया था.
क्या हुई लापरवाही
डॉ कामिनी कुमार कुलपति के पद पर रहते हुए तीसरे और चौथे श्रेणी के 36 कर्मियों को नियमित कर दिया गया. साथ ही रांची महिला महाविद्यालय के प्राचार्य से अवैध तरीके से भुगतान किए गए आवास भत्ते की वसूली के लिए 6 अप्रैल को आदेश दिया गया था, लेकिन इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया. ऐसे में राज्यपाल ने डॉक्टर कामिनी कुमार से इन सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा था कि आखिर किस आधार पर 36 कर्मियों को नियमित किया गया और भत्ते की वसूली का आदेश देने के बाद भी संबंध में इसका अनुपालन क्यों नहीं किया गया. राज्यपाल रमेश बैस ने और भी कई बिंदु पर डॉक्टर कामिनी कुमार से जवाब मांगा था. बता दें कि 20 जून 2022 को नए कुलपति की नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के बाद डॉक्टर कामिनी कुमार ने तत्कालीन कार्रवाई कुलपति के तौर पर स्वयं हस्ताक्षर करते हुए एक एमओयू विज्ञानप्रसार संस्थान के साथ किया. आमतौर पर विश्वविद्यालय के तरफ से यह कार्य कुलसचिव द्वारा किया जाता है. इस मुद्दे पर भी डॉ कामिनी कुमार दोषी पाई गई हैं.
Report By :- KOMAL SINHA, CITY DESK, NATION EXPRESS, रांची