NATIONAL DESK, NATION EXPRESS, मध्य प्रदेश
झाबुआ में महिला को दांत दर्द की दवा की जगह मेडिकल स्टोर से गेहूं में रखने वाली जहरीली गोली दे दी. महिला ने जहरीली गोली खा ली जिससे उसकी मौत हो गई. महिला की मौत के बाद हुए हंगामे के बाद मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया.
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बिना पढ़े ही थमा दी दवाबताया जा रहा है कि ये हादसा दुकान पर काम करने वाले संचालक की लापरवाही के कारण हुआ. मेडिकल संचालक ने बिना किसी सावधानी या जांच के उसे एक गोली दी, जो बाद में सल्फास की गोली निकली. सल्फास एक जहरीला पदार्थ है, जिसका उपयोग कीटों को मारने के लिए किया जाता है. रेखा ने घर जाकर गोली खा ली, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी. परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सदमें में परिवाररेखा की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. परिजनों का कहना है कि मेडिकल संचालक की घोर लापरवाही ने उनकी बेटी की जिंदगी छीन ली. रेखा के भाई ने बताया, “वह सिर्फ दांत दर्द की दवा लेने गई थी. अगर संचालक ने सही दवा दी होती, तो आज हमारी बहन जिंदा होती. यह हत्या से कम नहीं है.” गुस्साए परिजनों ने मेडिकल स्टोर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है. शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल संचालक को हिरासत में ले लिया. प्रारंभिक जांच में पता चला कि संचालक ने बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन या जांच के गोली दी थी. ड्रग इंस्पेक्टर को भी मामले की सूचना दी गई, जिन्होंने मेडिकल स्टोर पर छापा मारा और दुकान को सील कर दिया.
दिखी भारी लापरवाहीड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि स्टोर में दवाइयों के भंडारण और बिक्री में कई अनियमितताएं पाई गई हैं. मामले की गहन जांच की जा रही है और संचालक के खिलाफ मेडिकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह घटना कोई पहला मामला नहीं है. देश भर में मेडिकल स्टोर्स और छोटे क्लीनिकों की लापरवाही के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है. हाल ही में, हरदोई में एक अवैध अस्पताल में गलत इंजेक्शन के कारण एक मरीज की मौत हो गई थी, जिसके बाद अस्पताल को सील किया गया था. इसी तरह, झारखंड में एक महिला की मौत तब हुई थी, जब उसे बुखार की दवा के बजाय गलत दवा दी गई थी. इन घटनाओं से साफ है कि मेडिकल स्टोर्स और स्वास्थ्य सेवाओं में सख्त निगरानी की जरूरत है.
लोगों में भरा आक्रोशस्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है. धरमपुरी गांव के निवासियों ने मेडिकल स्टोर के खिलाफ प्रदर्शन किया और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. एक ग्रामीण ने कहा, “हमारी बहन-बेटियों की जान इतनी सस्ती नहीं है. ऐसी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को उठाते हुए सरकार से मेडिकल स्टोर्स के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की है. यह दुखद घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी स्वास्थ्य सेवाएं वाकई सुरक्षित हैं? मेडिकल स्टोर्स पर बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयों की बिक्री और लापरवाहीपूर्ण रवैया कितने और परिवारों को तबाह करेगा? रेखा की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ा है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं. क्या इस घटना के बाद प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा, या यह भी एक और खबर बनकर रह जाएगी? समय ही बताएगा.