DGP तदाशा मिश्रा ने हाईकोर्ट में लगाई हाज़री ! चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर के सामने मांगी माफ़ी, कहा- कि गलती हुई है
CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
फर्जी नक्सली सरेंडर मामले में डीजीपी ने हाई कोर्ट में मांगी माफी, 514 छात्रों को नक्सली बताकर सरेंडर कराने की थी योजना
फर्जी नक्सल सरेंडर मामले में एक सप्ताह में विस्तृत जवाब तलब
बहुचर्चित फर्जी नक्सल सरेंडर मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर डीजीपी तदाशा मिश्रा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा कि वर्ष 2021 में आदेश जारी होने के बावजूद अब तक न तो पुलिस और न ही राज्य सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई की।
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अदालत ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले को हल्के में लिया जा रहा है और निचले अधिकारी से शपथ पत्र दाखिल कराना उचित नहीं है। डीजीपी ने कोर्ट से हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए कहा कि गलती हुई है और समय देकर जल्द विस्तृत जवाब दायर किया जाएगा। अदालत ने अगली सुनवाई 15 दिसंबर निर्धारित की है और चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में दिग्दर्शन इंस्टीट्यूट के माध्यम से 514 छात्रों को नक्सली बताकर कथित तौर पर फर्जी तरीके से सरेंडर कराया गया था।
514 युवाओं को फर्जी तौर पर नक्सली घोषित कर उनका सरेंडर कराया
न्यूज एजेंसी आईएनएस के हवाले से याचिका में दावा किया गया है कि झारखंड के 514 युवाओं को फर्जी तौर पर नक्सली घोषित कर उनका सरेंडर कराया गया, ताकि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी उपलब्धि दिखा सकें और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष पुरस्कार प्राप्त कर सकें। याचिका में यह भी कहा गया है कि युवाओं को सीआरपीएफ में नौकरी दिलाने का लालच दिया गया था। इसके लिए राज्य सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए गए। पूर्व में इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के गृह सचिव को युवाओं के सरेंडर संबंधी तथ्यों पर सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या जिन युवाओं को नक्सली बताकर सरेंडर कराया गया, उन्हें वास्तव में रांची के पुराने जेल परिसर में प्रशिक्षण दिलाया गया था और यदि हां, तो क्या वह प्रशिक्षण कानूनी रूप से वैध था? इस कथित फर्जी सरेंडर प्रकरण में दिग्दर्शन कोचिंग इंस्टीट्यूट का नाम सामने आया था। आरोप है कि इस संस्थान ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से 514 छात्रों को नक्सली घोषित कर सरेंडर कराया। पुलिस की आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन युवाओं में से केवल 10 के ही नक्सली गतिविधियों से संबंध पाए गए। जांच दल ने 128 युवाओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से अधिकांश के पते की पुलिस सत्यापन नहीं कर पाई या वे उन पतों पर मिले ही नहीं। जांच प्रक्रिया अधूरी रहने के बावजूद, मामले को बंद कर दिया गया था।
आरएफओ-एसीएफ भर्ती: कोर्ट ने मई 2026 तक रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने जेपीएससी को निर्देश दिया है कि असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम मई 2026 के अंतिम सप्ताह तक जारी किया जाए। कोर्ट ने जेपीएससी द्वारा दायर प्रति-शपथ पत्र स्वीकार करते हुए बताया कि एसीएफ की प्रारंभिक परीक्षा 13 जुलाई 2025 और आरएफओ की परीक्षा 29 जून 2025 को हुई थी। मॉडल आंसर कई चरणों में संशोधित किए गए और अंतिम संशोधित उत्तर 25 नवंबर 2025 को जारी किए गए। एसीएफ का मेंस 6-9 फरवरी 2026 और आरएफओ का मेंस 22-24 जनवरी 2026 को आयोजित होगा। दोनों परीक्षाओं के मेंस मूल्यांकन और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम परिणाम मई 2026 के अंतिम सप्ताह तक प्रकाशित किया जाएगा। अगली सुनवाई 11 जून 2026 को होगी।