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हेमंत सरकार से नाराज हैं कांग्रेस विधायक
सरयू राय के बयान से मची खलबली :- जब तक कांग्रेस चाहेगी, राज्य सरकार चलेगी’
झारखंड में विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही महागठबंधन सरकार में नाराजगी शुरू हो गई है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बुलाई गई यूपीए की बैठक में कांग्रेस का कोई भी विधायक शामिल नहीं हुआ.
झारखंडः हेमंत सोरेन सरकार में बगावत
झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही गठबंधन सरकार के कामकाज से विधायक हैं नाराज
झारखंड (Jharkhand) की राजनीति (Politics) में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. अचानक राज्य की सियासत में सरगर्मी बढ़ गई है. झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र को देखते हुए गुरुवार को सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की अध्यक्षता में महागठबंधन के घटक दलों की बैठक आयोजित की गई थी. लेकिन, हैरानी की बात ये रही कि, गठबंधन के अहम घटक दल कांग्रेस (Congress) ने इस बैठक से दूरी बना ली.
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तेज हुई सियासी हलचल
कांग्रेस के बैठक में शामिल ना होने की वजह से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है. इतना ही नहीं, प्रदेश में कयासबाजी का दौर भी शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि, कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार से नाराज है. महागठबंधन में शामिल दलों के विधायकों की बैठक सीएम हेमंत सोरेन के आवास पर हुई थी. इस बीच सीएम सोरेन की अध्यक्षता वाली बैठक में शामिल ना होकर कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी के विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के आवास पर बैठक की.
झारखंड की हेमंत सरकार खतरे में
12वें मंत्री पद को लेकर कांग्रेस और जेएमएम के बीच बढ़ी दूरियां
दिल्ली से लेकर झारखंड तक सियासी माहौल गर्म
सूत्रों से मिली जानकारी दिल्ली में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मिला बीजेपी के तरफ से ऑफर
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस और जेएमएम के बीच तनातनी
कहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस से परेशान तो नहीं
झारखंड में सियासी उबाल
ऐसा ना हो कि कांग्रेस की किच-किच से परेशान सीएम हेमंत सोरेन राज्यपाल को सौंप दे अपना इस्तीफा
झारखंड में भाजपा हुआ अचानक एक्टिव
कांग्रेस और JMM के कई नाराज विधायकों से भाजपा संपर्क में
कई मुद्दों पर नहीं है एक राय
बताया जा रहा है कि, कांग्रेस हेमंत सोरेन सरकार से कई मुद्दों को लेकर नाराज है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार में उनकी नहीं सुनी जाती है. इसके अलावा स्थानीय भाषा, ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण, जेपीएससी जैसे मुद्दों पर भी गठबंधन के दलों में एक राय नहीं है.
झारखंड कांग्रेस के कई विधायक नाराज, अब सोरेन सरकार के अंदर बढ़ रही बेचैनी
झारखंड (Jharkhand) में प्रेशर पॉलिटिक्स का खेल शुरू हो गया है. हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सरकार में शामिल मुख्य सहयोगी दल ने इसकी शुरुआत की है. बोर्ड-निगम के बंटवारे से लेकर 20 सूत्रीय गठन और सरकार के अंदर कांग्रेस विधायकों, नेताओं को तवज्जो देने को लेकर हल्ला बोला गया है. कांग्रेस की इस राजनीति और रणनीति को उसकी मजबूरी और उसकी अनदेखी के साथ जोड़ कर भी देखा जा रहा है.
झारखंड में कांग्रेस विधायकों की नाराजगी से शुरू हुई राजनीति अब सरकार के अंदर बेचैनी बढ़ा रही है. बाहर से भले ही कांग्रेस विधायकों की नाराजगी संगठन तक सीमित दिख रही हो, पर असल में ये कांग्रेस के रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है . अगर ऐसा नहीं होता तो नाराज विधायकों को आलमगीर आलम के आशियाने में जगह नहीं मिलती. राज्य में सत्ताधारी दल होने के बावजूद कांग्रेस विधायकों पर मुकदमा दर्ज होना, कई तरह के संकेत देता है. हालांकि कांग्रेस ने जिन मुद्दों पर खुद की सरकार पर हमला बोला है उसमें भी दम दिखता है
झारखंड कांग्रेस की मांग
कांग्रेस की ओर से जो मांग की जा रही है उसमें राज्य में बोर्ड – निगम के पद का बंटवारा, सूचना आयोग और महिला आयोग के अध्यक्ष जैसे पद रिक्त, 20 सूत्री और निगरानी समिति का गठन, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को विधानसभा में कांग्रेस विधायक की मान्यता, कांग्रेस विधायकों पर लगातार हो रहे मुकदमों से नाराजगी, जिला स्तर पर अधिकारियों के द्वारा कांग्रेस नेताओं की अनदेखी, 12 वें मंत्री पद पर कांग्रेस की दावेदारी प्रमुख हैं.
दिल्ली तक पहुंची कांग्रेस की नाराजगी की आवाज
राजनीति के अंदर खाने इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री भी नाराज चल रहे हैं. हाल के घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा उचित आश्वासन दिए जाने के बावजूद उसके ठीक उलट करवाई की गई. रांची से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के विधायक और नेता दौड़ लगा रहे हैं. सरकार के हर कदम की जानकारी दिल्ली आलाकमान को दी जा रही है. कांग्रेस के अंदर से भी जो मांग उठ रही है उसे पार्टी के नेता नजरअंदाज नहीं कर सकते. इसकी बड़ी वजह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सरकार के अंदर उचित मान – सम्मान देने का वादा है. जो अब तक पूरा नहीं हो सका.
राज्य में हेमंत सोरेन सरकार गठन के डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. अब तक विकास के सवाल पर राज्य सरकार कोरोना का रोना रोती रही है. मगर अब कांग्रेस खुद की सरकार से काम चाहती है. वो चाहती है कि जनता से किया गया हर वादा समय पर पूरा हो, वरना जनता माफ नहीं करेगी.
जब तक कांग्रेस चाहेगी, राज्य सरकार चलेगी’
इस बीच प्रदेश के दिग्गज नेता सरयू राय के बयान ने हेमंत सरकार में बगावत की खबरों को और धार दे दी है. सरयू राय ने मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य सरकार की स्थिरता को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार को लेकर साफ कहा कि जब तक कांग्रेस चाहेगी, राज्य सरकार चलेगी. सियासी जानकार सरयू राय के इस बयान के कई मायने निकाल रहे हैं. इस बयान को कांग्रेस पार्टी के विधायकों की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
Report By :- MINAKSHI SHARMA, POLITICAL EDITOR, NATION EXPRESS, RANCHI
हेमंत सरकार से नाराज हैं कांग्रेस विधायक