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झारखंड का सियासी तापमान चरम पर : PM MODI और गृह मंत्री से मुलाकात कर रांची लौटे गवर्नर, सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी, हेमंत सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं राज्यपाल

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POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI / NEW DELHI

संकटों से घिरे हेमंत सोरेन क्या सरकार बचा पाएंगे?

राज्यपाल के वापस रांची लौटते हैं इन दिनों झारखंड कक्षा शी तापमान चरम पर पहुंच गया है विशेषज्ञों की मानें तो झारखंड के राज्यपाल हेमंत सोरेन को जल्द ही राजभवन तलब कर सकते हैं माननीय राज्यपाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफा मांग सकते हैं या हेमंत सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं जिसके बाद झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनना लगभग तय माना जा रहा है अगर हम दिल्ली के अंदरूनी राजनीति की बात करें तो झारखंड के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर झारखंड की राजनीति के बारे में बताया गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यपाल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजभवन बुलाने का आदेश दिया है आने वाले कुछ घंटों में पता चल जाएगा झारखंड में हेमंत की सरकार बच पाती है या सरकार चली जाएगी

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राज्य का सियासी तापमान चरम पर है। हर दिन घट रहे घटनाक्रम के बाद यह जिज्ञासा लगातार बढ़ती ही जा रही है कि अब आगे क्या होगा? राज्यपाल दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात कर वापस आ गए हैं। राजभवन से छन-छनकर जो सूचनाएं आ रही हैं, उन्हें सही माना जाए तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके छोटे भाई विधायक बसंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अगर इन दोनों की सदस्यता जाती है तो गठबंधन सरकार का भविष्य क्या होगा?

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सरकार का मुखिया कौन होगा? ऐसे कठिन हालात में गठबंधन के साथी दल और उनके विधायक क्या एकजुट रह पाएंगे? भाजपा की क्या रणनीति रहेगी? आदि सवाल भी साथ-साथ चल रहे हैं। राजनीतिक गलियारे में जितने सवाल हैं उतने ही समीकरण। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही कानूनी जानकारों की शरण में हैं और राज्य की नौकरशाही चुपचाप चटखारे लेने में तल्लीन है। यह सभी मान रहे हैं कि मई महीना राजनीतिक दृष्टि से काफी उठल-पुथल भरा रह सकता है।

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके छोटे भाई विधायक बसंत सोरेन

इस पूरी उठा-पटक के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं। हेमंत सोरेन द्वारा खुद के नाम खनन पट्टा लेने और बसंत सोरेन की एक खनन कंपनी में पार्टनरशिप होने का राज उन्होंने ही खोला है। इससे बौखलाई झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और सरकार में उसकी सहयोगी कांग्रेस उन पर हमलावर है। उनके कार्यकाल के समय के भ्रष्टाचार को सामने लाने की धमकी भी दी जा रही है। उधर, रघुवर दास पलटवार कर रहे हैं। वह कह रहे हैं अगर उन्होंने कोई अनैतिक कृत्य किया है तो सरकार जांच क्यों नहीं करवा रही है? सांच को कोई आंच नहीं। इस बीच उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के खिलाफ भी एक और राज खोला है। उनका दावा है कि कल्पना सोरेन की कंपनी सोहराय लाइव स्टाक प्राइवेट लिमिटेड को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित चार औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। इनका कुल रकबा करीब 12 एकड़ है।

रघुवर दास: jharkhand ex cm raghubar das big allegation against jharkhand  chief minister hemant soren and wife kalpana soren : झारखंड के पूर्व सीएम  रघुबर दास पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत ...रघुवर दास ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री (जो राज्य के उद्योग और खनन मंत्री भी हैं) ने पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इन चार भूखंडों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करवाया और फिर इन्हें अपनी पत्नी की कंपनी के नाम आवंटित कर दिया। इतना ही नहीं, अपने मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद की कंपनी शिव शक्ति इंटरप्राइजेज के नाम पर साहिबगंज के पाकुड़िया ग्राम में 11.70 एकड़ की खदान 10 साल के लिए आवंटित कर दी। अपने विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र की कंपनी महाकाल स्टोन के नाम भी साहिबगंज में एक खदान आवंटित की। इन तमाम आरोपों पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। झामुमो और कांग्रेस ने जरूर रघुवर दास के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और उनके कार्यकाल के भ्रष्टाचार गिना रहे हैं। दोनों दलों के प्रतिनिधि राज्यपाल से मिलकर यह आग्रह भी कर चुके हैं कि कोई भी कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री का पक्ष जरूर सुना जाए। राज्यपाल ने सत्ता पक्ष को आश्वस्त किया है कि राजभवन जो भी कदम उठाएगा वह पूरी तरह विधिसम्मत होगा।

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अब सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हुई हैं। भाजपा की तरफ से की गई शिकायत में तर्क दिया गया है कि हेमंत सोरेन द्वारा खनन पट्टा लेना और बसंत सोरेन का एक खनन कंपनी में पार्टनर होना गृह मंत्रलय की ओर से मंत्रियों के लिए जारी आचार संहिता का उल्लंघन है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) के तहत आपराधिक कृत्य है। भाजपा ने यह भी आग्रह किया था कि विधानसभा के सदस्यों की निर्हता से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत निर्वाचन आयोग की राय लेकर इनकी विधानसभा सदस्यता निरस्त की जाए। राज्यपाल ने इस बाबत निर्वाचन आयोग से राय मांगी है। निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को खनन लीज संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता सत्यापित करने को कहा था। मुख्य सचिव ने दोनों ही मामलों की रिपोर्ट आयोग को भेज दी है। अब सभी आयोग के मंतव्य का इंतजार कर रहे हैं। गठबंधन सरकार में काफी अफरातफरी की स्थिति है। दबी जुबान सभी स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ गलती तो हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने खुलेआम प्रेस से बातचीत में यह स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि गलती को स्वीकार कर लेना काई अपराध नहीं है। मतलब गलती हुई है।

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अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस में तो पहले से ही विरोध के कई स्वर उभरते रहे हैं। वहां टूट-फूट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप पर आपस में कलह होती रहती है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली दौड़ एकाएक बढ़ गई है। झामुमो, कांग्रेस और भाजपा, तीनों दलों में ही बहुत कुछ पक रहा है, जो अगले कुछ दिनों में सबके सामने आ जाएगा।

Report By :- ANUJA AWASTHI / SIMRAN CHOUDHRY, POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI / NEW DELHI

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