रांची में मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी के गरजने से हिल गई दिल्ली ! वक्फ संशोधन बिल पर भड़के मौलाना कहा- शरीयत में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
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वक्फ बोर्ड बिल में संशोधन पर मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यह एक प्रकार से मुसलमानों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों में खुला हस्तक्षेप है. संविधान ने हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने का पूरा अधिकार भी दिया है.
भाजपा के आंख में चुभ रही है वक्फ की ज़मीन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के द्वारा देशव्यापी अभियान के तहत वक़्फ़ के संरक्षण एवं केंद्र सरकार द्वारा वक़्फ़ विधेयक के ख़िलाफ़ झारखंड राज्यस्तरीय “तहफ़्फ़ुज़-ए-अवकाफ कांफ्रेंस” हज़ हॉउस रांची में आयोजित किया गया.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के द्वारा देशव्यापी अभियान के तहत वक़्फ़ के संरक्षण एवं केंद्र सरकार द्वारा वक़्फ़ विधेयक के ख़िलाफ़ झारखंड राज्यस्तरीय कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने किया. कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि बोर्ड के महासचिव शेख ए तरीकत हजरत मौलाना शाह मोहम्मद फज़लूररहीम मुजहिदी और विशिष्ट अतिथि बोर्ड के प्रवक्ता डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास और बोर्ड के सदस्य मौलाना अबू तालिब रहमानी, कांग्रेस नेता अजय शाहदेव, AIMIM राँची विधानसभा अध्यक्ष महताब आलम मौजूद थे. देश और झारखंड के प्रतिष्ठित उलेमा,बुद्धिजीवी,अल्पसंख्यक प्रतिनिधि, राजनेता, विशिष्ट व्यक्ति एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे.
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सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाने की तैयारी के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा कि वक्फ बोर्ड की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने एनडीए के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों से भी “ऐसे किसी भी कदम को पूरी तरह से खारिज करने” और संसद में ऐसे संशोधनों को पारित न होने देने का आग्रह किया है.मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ क़ासिम रसूलइलियास ने कहा कि बोर्ड सभी मुसलमानों और उनके धार्मिक और मिल्ली संगठनों से “सरकार के इस दुर्भावनापूर्ण कृत्य” के खिलाफ एकजुट होने की अपील करता है. उन्होंने एक बयान में कहा कि बोर्ड इस कदम को विफल करने के लिए सभी तरह के कानूनी और लोकतांत्रिक कदम उठाएगा.उन्होंने कहा कि सरकार वक्फ अधिनियम में लगभग 40 संशोधनों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों की स्थिति और प्रकृति को बदलना चाहती है, ताकि उनका कब्जा आसान हो जाए.

बोर्ड यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण मानता है कि वक्फ संपत्तियां मुस्लिम परोपकारियों द्वारा धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित दान हैं, और सरकार ने केवल उन्हें विनियमित करने के लिए वक्फ अधिनियम बनाया है. इलियास ने दावा किया वक्फ अधिनियम और वक्फ संपत्तियां भारत के संविधान और शरीयत आवेदन अधिनियम, 1937 द्वारा संरक्षित हैं. इसलिए, सरकार ऐसा कोई संशोधन नहीं कर सकती जो इन संपत्तियों की प्रकृति और स्थिति को बदल दे.इस मौके पर ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के झारखंड प्रतिनिधि मौलाना डॉक्टर मोहम्मद यासीन कासमी,डॉक्टर मजीद आलम, अख्तर शहजाद उर्फ प्रिंस, अब्दुल अल्लाम, मुफ़्ती नज़र तौहीद मज़हरी, काज़ी मुफ़्ती मोहम्मद अनवर कासमी, डॉ हसन रज़ा और मौलाना शमसुल साल्फी और सैफुल हक़, नदीम खान समेत कई लोग मौजूद थे. इदरीसीया महा पंचायत के मनोवर हुसैन और उनकी टीम और मिलली पंचायत के जावेद अहमद की मेहनत ने इतने बड़े कार्यक्रम को कामयाब बनाने में अहम रोल अदा किया,

मुस्लिमों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप
मौलाना शाह मोहम्मद फज़लूररहीम मुजहिदी ने कहा कि वक्फ मुसलमानों के महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्यों में शामिल है. वक्फ ट्रिब्यूनल समाप्त करके कलक्टर के पास अधिकार दिए जाने से भारत की न्यायिक स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी और कलक्टर राज का आरंभ होगा.उन्होंने कहा कि वक्फ द्वारा प्राप्त होने वाले धन को सरकार मुसलमानों में वितरित करेगी, सरकार का यह फैसला धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है, जो मुसलमानों को स्वीकार नहीं है. मौलाना शाह मोहम्मद फज़लूररहीम मुजहिदी ने कहा कि यह हिंदू-मुस्लिम का मामला नहीं है, बल्कि देश के संविधान, नियम और धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा है, यह बिल हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है.
उन्होंने कहा कि जब से यह सरकार आई है, विभिन्न हथकंडों और बहानों से मुसलमानों को अराजकता और भय में रखने के लिए ऐसे-ऐसे नए कानून ला रही है, जिससे हमारे धार्मिक मामलों में खुला हस्तक्षेप होता है, हालांकि सरकार यह बात भलीभांति जानती है कि मुसलमान हर नुकसान सह सकता है, लेकिन अपनी शरीयत में कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकता.
संवैधानिक अधिकारों में खुला हस्तक्षेप

डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने स्पष्ट किया कि यह एक प्रकार से मुसलमानों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों में खुला हस्तक्षेप है. संविधान ने हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने का पूरा अधिकार भी दिया है.
डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा कि मुसलमानों ने जो वक्फ किया है और जिस उद्देश्य से वक्फ किया है, कोई भी वक्फकर्ता की इच्छा के खिलाफ प्रयोग नहीं कर सकता है. सरकार मुसलमानों की अरबों खरबों की संपत्तियों को हड़प करना चाहती है, जैसा कि उसने अतीत में चाहे वह यूसीस. का मामला हो या तलाक का मामला हो या नान-नफका (गुजारा भत्ता) का मसला हो, उसने उसमें हस्तक्षेप किया है.
वक्फ में कोई भी संशोधन स्वीकार नहीं

मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा कि हमें ऐसा कोई संशोधन स्वीकार नहीं जो वक्फकर्ता की इच्छा के विपरीत हो या जो वक्फ की स्थिति को बदल दे. अब इस समय सरकार वक़्फ के नियमों में संशोधन बिल लाकर मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रही है, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि वक्फ एक्ट 2013 मैं कोई ऐसा परिवर्तन, जिससे वक्फ संपत्तियों की स्थिति या स्वभाव बदल जाए या कमजोर हो जाए, यह कदापि हमें स्वीकार नहीं है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हर समय वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं और आज भी हम इस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि भारत के मुसलमान सरकार की हर उस योजना के खिलाफ होंगे जो वक्फ की गई संपत्तियों की सुरक्षा की गारंटी न देता हो.
भाजपा देश से मोहब्बत नहीं देश को बर्बाद करना चाहती है :- अजय शाहदेव
कांग्रेस नेता अजय शाहदेव ने कहा कि भाजपा हमेशा हिंदू मुस्लिम में तोड़ पैदा करना चाहती है, लेकिन कभी कमियाब नही होगी। एक मुद्दा खत्म होता है तो दूसरा मुद्दा लाकर खड़ा कर देती है। भाजपा देश से मोहब्बत नहीं देश को बर्बाद करना चाहती है। झारखंड और देश के लोगो को जागरूक होने की जरूरत है। सच और झूठ की लड़ाई है। वहीं अजय शाहदेव ने आगे कहा कि भाजपा साजिश करने से पीछे नहीं हट रही। जान बुझ कर देश में अशांति पैदा करना चाहती है। इस बिल के खिलाफ़ हम आवाज उठाएंगे और तेलंगाना के तरह इस बिल के खिलाफ झारखंड में काम करेंगे। मुख्यमंत्री से इस संबंध में बात करेंगे।कांग्रेस नेता अजय शाहदेव ने कहा कि वक्फ की लड़ाई नहीं बल्कि संविधान बचाने की लड़ाई है। भाजपा के केंद्र सरकार वक्फ की जमीन पर कब्ज़ा करना चाहती है यानी अपने लोगो को फायदा पहुंचाना चाहती है। हम इस बिल के खिलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे। हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब मिलकर वक्फ की जमीन को बचाने के लिए आगे आएंगे अगर जेल भी जाना पड़ा तो जेल के सलाखों के पीछे जाने से पीछे नहीं हटेंगे
वक्फ संशोधन बिल-2024 किसी भी हाल में कुबूल नहीं : मौलाना असगर मिस्बाही
मौलाना असगर मिस्बाही ने कहा कि जब किसी मंदिर कमेटी में किसी अन्य धर्म के लोगों को शामिल नहीं किया जाता है, तो फिर गैर मुस्लिम को वक्फ बार्ड में कैसे शामिल किया जा सकता है। संसद में भी सेक्युलर लोग उक्त बिल का विरोध कर रहे हैं। वक्फ संशोधन बिल-2024 किसी भी हाल में कुबूल नहीं किया जाएगा। यह बिल भारत के मुसलमान किसी हाल में नहीं मानेंगे। असगर मिस्बाही ने कहा कि इस बिल को संसद में लाकर कलेक्टर के हवाले कर देने की बात आ रही है, पर संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। उन्होंने प्रधानमंत्री से इसकी समीक्षा करने की अपील की है।
क्या है वक्फ बोर्ड :- महताब आलम, अध्यक्ष,AIMIM राँची विधानसभा

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के द्वारा देशव्यापी अभियान के तहत वक़्फ़ के संरक्षण एवं केंद्र सरकार द्वारा वक़्फ़ विधेयक के ख़िलाफ़ झारखंड राज्यस्तरीय “तहफ़्फ़ुज़-ए-अवकाफ कांफ्रेंस” हज़ हॉउस रांची में आयोजित किया गया, मीडिया से बात करते हुए AIMIM राँची विधानसभा अध्यक्ष महताब आलम ने कहा वक्फ पर बहस कोई पहली बार नहीं छिड़ी है. अक्सर वक्फ को लेकर कई तरह के मामले सुनने को मिलते हैं. लेकिन ये वक्फ क्या है और इसका क्या मतलब होता है. दरअसल वक्फ ‘अल्लाह के नाम’ यानी कुछ ऐसी जमीनें, जो किसी के भी नाम नहीं होती है, लेकिन मुस्लिम समाज से उनका ताल्लुक है. वो वक्फ की जमीनें होती हैं. इन जमीनों पर मस्जिद, मदरसे, मजार, नुमाइश, ईदगाह और कब्रिस्तान बनाए जाते हैं. लेकिन एक समय के बाद सामने आया कि इन जमीनों का गलत ढंग से इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया, जिससे की मुस्लिम समाज की जमीनों पर नियंत्रण रखा जा सके. कुल मिलाकर वक्फ की जमीनों जमीनों को गैर कानूनी तरीकों से बचाने के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया था. हालांकि वक्फ में सिर्फ जमीनें ही नहीं कुछ भी सामान आ सकता है, जो दान किया गया हो.
Report By :- PALAK TIWARI / HEENA KHAN, CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI