‘ऑपरेशन लोटस’ : मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा बयान : TMC के 38 विधायक भाजपा के संपर्क में, सियासी गलियारे में हड़कंप, टीएमसी में खलबली
POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, पश्चिम बंगाल
क्या बंगाल में भी सरकार बना सकती है भाजपा, मिथुन के बयान का क्या मतलब, आंकड़े क्या कहते हैं?
अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती का आज बड़ा बयान आया। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 38 विधायक हमारे (भाजपा) के संपर्क में हैं। कहा कि अगले कुछ दिनों में देश के चार और राज्यों में भाजपा की सरकार बन जाएगी। इशारा पश्चिम बंगाल की तरफ भी था।उनके इस बयान ने सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया। खासतौर पर टीएमसी में खलबली मची हुई है।
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ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) बीजेपी को चुनाव में शिकस्त देकर फिर से CM की कुर्सी पर काबिज हो गयीं – लेकिन ये बात मोदी-शाह (Modi and Shah) को हजम हो तो कैसे, लिहाजा पूरी टीम अपने अलग शपथग्रहण के बाद ऑपरेशन लोटस (Operation Lotus) के नये मिशन में जुट गयी है!

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में भाजपा पश्चिम बंगाल में भी सरकार बना सकती है? मिथुन चक्रवर्ती के बयान का क्या मतलब है? पश्चिम बंगाल के आंकड़े क्या इशारा करते हैं? आइए जानते हैं…
पहले जानिए मिथुन चक्रवर्ती ने बयान क्या दिया?
मिथुन एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। यहां उन्होंने मीडिया से खुद सवाल पूछा कि क्या आपको ब्रेकिंग न्यूज चाहिए? इसके बाद उन्होंने खुद जवाब दिया। बोले, ‘आज के वक्त तृणमूल कांग्रेस के करीब 38 विधायकों के हमारे साथ अच्छे रिश्ते हैं। इनमें से करीब 21 तो सीधे मेरे संपर्क में हैं। यह तो अभी म्यूजिक लॉन्च है, फिल्म की धमाकेदार रिलीज तो अभी बाकी है।’
आगे उन्होंने कहा, ‘अभी 18 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। जल्द 4 और राज्यों में BJP सत्ता में आ जाएगी।’ मिथुन ने महाराष्ट्र का हवाला दिया। बोले, ‘एक दिन मैं सोकर उठा और अचानक देखा तो भाजपा और शिवसेना सरकार बन चुकी थी। ऐसा यहां (बंगाल) में नहीं हो सकता क्या? मैं नहीं मानता।’
महाराष्ट्र की राजनीति पर ममता क्या बोलीं?
मिथुन के इस बयान से पहले ममता इसी विषय पर बुधवार को बोल चुकी थीं। उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीतिक उथलपुथल का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल को महाराष्ट्र समझने की भूल न की जाए। ममता बोलीं, ‘उनके (भाजपा) पास कोई काम नहीं है। वे केवल 3-4 एजेंसियों के जरिए राज्य सरकारों को अपने हाथ में ले लेते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र पर कब्जा कर लिया है लेकिन बंगाल ने उन्हें हरा दिया। बंगाल को तोड़ना आसान नहीं है क्योंकि आपको पहले रॉयल बंगाल टाइगर से लड़ना होगा।’ ममता ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि भाजपा 2024 में नहीं आएगी। भारत में बेरोजगारी 40% बढ़ रही है लेकिन बंगाल में 45% कम हो गई। आज मीडिया ट्रायल चल रहा है और वे लोगों को आरोपी कह रहे हैं। वे सिर्फ बंगाल की छवि खराब करना चाहते हैं।

तो क्या सच में ममता सरकार पर मंडरा रहा खतरा?
यह पहली बार भी नहीं था, जब ममता बनर्जी ने सरकार गिराने को लेकर खुले मंच से कुछ कहा हो। पिछले चार दिन के अंदर दूसरी बार उन्होंने कहा कि भाजपा ईडी और अन्य एजेंसियों की मदद से राज्यों में विपक्ष की सरकार गिराने का काम कर रही है। वह बंगाल में ऐसा नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह कहते हैं, ‘ममता बनर्जी के दोनों बयानों को समझा जाए तो यह साफ पता चलता है कि उन्हें इस बात की आशंका है कि पश्चिम बंगाल में भी भाजपा सक्रिय हो गई है। वह खुद को सामान्य पेश करके पब्लिक और अपने विधायकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि अभी सबकुछ ठीक है।’
मिथुन के बयान का क्या मतलब?
हमने यही सवाल राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह से पूछा। उन्होंने कहा, ‘मिथुन के बयान से दो मतलब निकाले जा सकते हैं। पहला यह कि वाकई में भाजपा के संपर्क में टीएमसी के कुछ विधायक हो सकते हैं और दूसरा यह कि ये एक तरह की सियासी चाल हो। इसके जरिए भाजपा टीएमसी विधायकों के बीच एक संदेश देना चाहती हो। इससे उनमें से कुछ खुद से ही भाजपा के संपर्क में आ सकते हैं और उनसे यह कह सकते हैं कि अगर एकसाथ कई विधायक टीएमसी से टूटे तो वह भी उनका साथ देंगे।

अभी क्या हैं बंगाल विधानसभा के आंकड़े?
पश्चिम बंगाल में 2021 में ही विधानसभा चुनाव हुए थे। 294 सीटों वाले इस राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 215 सीटों पर जीत हासिल की। 77 सीटों के साथ भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। चुनाव के बाद भाजपा के छह विधायक टूटकर टीएमसी में शामिल हो गए। जिसके बाद इन सीटों पर उपचुनाव हुए। मौजूदा समय 294 सीटों वाले विधानसभा में 220 टीएमसी के सदस्य हैं, जबकि 71 भाजपा के विधायक हैं। बाकी एक सीट बीजीपीएम, एक आईएसएफ की है। एक सीट खाली है।

तो क्या सच में गिर सकती है ममता की सरकार?
पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लिए 148 विधायकों का साथ चाहिए होता है। अभी ममता के साथ 220 विधायक हैं। मतलब जरूरत से 72 विधायक ज्यादा हैं। भाजपा के पास अभी 71 विधायक हैं। मतलब जरूरत से 77 विधायक कम। अगर मिथुन चक्रवर्ती के दावे के अनुसार मान भी लेते हैं कि टीएमसी के 38 विधायक टूटकर भाजपा में शामिल हो जाएंगे तो भी भाजपा को बहुमत के आंकड़े को छूने के लिए 39 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, ये इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि, बगावत करने वालों पर दलबदल कानून की तलवार लटक सकती है। 
तो क्या भाजपा की सरकार नहीं बन सकती?
हमने यही सवाल प्रो. अजय से पूछा। उन्होंने कहा, नहीं, ऐसा नहीं है। अगर भाजपा महाराष्ट्र जैसी स्थिति बंगाल में करने में कामयाब होती है तो यहां भी सरकार बनाने में सफलता मिल सकती है। इसके लिए टीएमसी के दो तिहाई यानी 147 विधायकों को तोड़ना होगा। तभी ये विधायक दल बदल कानून से बच सकेंगे और भाजपा की सरकार बन सकेगी।
Report By :- SHIVANI SINGH, POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, पश्चिम बंगाल