रामगढ़ के सरकारी स्कूल में पाकिस्तानी सोशल वर्कर मलाला यूसुफजई की तस्वीर को लेकर बवाल : मुखिया के विरोध पर हटाई गई
NEWS DESK, NATION EXPRESS, रामगढ़
Jharkhand: स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया स्कूल कि एक शिक्षिका ने छात्राओं को प्रेरित करने के लिए मलाला यूसुफजई की तस्वीर विद्यालय में लगाई थी. इसके लिए शिक्षिका ने उनसे परमिशन भी मांगा था.
सरकारी स्कूल में मलाला यूसुफजई की फोटो को देखकर गांव के मुखिया सहित ग्रामीण भड़क गए. उन्होंने इस मामले में अपनी नाराजगी जताते हुए स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
राजधानी रांची (Ranchi) से सटे रामगढ़ के मांडू गांव से हैरान करने वाली घटना सामने आई है.दरअसल, रामगढ़ के स्कूल में मलाला यूसुफजई की तस्वीर को लेकर बवाल हो गया है। तस्वीर हटा दी गयी लेकिन तब तक इस विवाद ने रफ्तार पकड़ ली। स्कूल में लगी तस्वीर पर सबसे पहले मुखिया ने आपत्ति दर्ज की। कुजू के डटमा मोड़ स्थित कुजू पब्लिक हाई स्कूल में यह तस्वीर लगी थी।
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तस्वीर लगी फिर हुआ बवाल तो हटा दी गयी तस्वीर
यह स्कूल पुराना और चर्चित है। इस पर विवाद खड़ा हो गया तो तस्वीर हटा दी गयी। इस मामले पर विवाद बढ़ा तो मलाला की तस्वीर लगाने वाली शिक्षिका मनीषा धवन ने कहा, तस्वीर बच्चों को प्रेरित करने के लिए लगाई गयी थी। तस्वीर चार महीने तक लगी रही लेकिन इसे लेकर बवाल होता रहा। 24 जनवरी को स्कूल के गेट के मुख्य द्वार पर तस्वीर लगी थी। 17 मई को कुजू पश्चिमी पंचायत के मुखिया जय कुमार ओझा की नजर दीवार पर पड़ी ,तो उन्होंने इसका विरोध किया। अब तस्वीर हटा दी गयी है।

शुरू हुई राजनीति
इस तस्वीर को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, तस्वीर हटाना गलत फैसला है। मलाला की तस्वीर हटाकर राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उनकी सोच कितनी कट्टर है, मलाला से कोई भी बच्चा प्रेरणा ले सकते हैं। वह शिक्षा के लिए लड़ी।
मुखिया ने कहा, क्या भारत में कम है प्रेरणादायक महिलाएं
मुखिया जय कुमार ओझा ने तस्वीर पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा, अगर तस्वीर लगानी है तो भारतीय की लगायें, हमारे देश में सावित्रीबाई फुले, किरण बेदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटील, द्रोपदी मुर्मू जैसी कई महिलाएं हैं, उनकी तस्वीर क्या बच्चों को प्रेरणा नहीं देती। पाकिस्तान की एक लड़की की तस्वीर स्कूल में लगाना सरासर गलत है। इस पूरे मामले पर स्कूल के प्रिंसिपल रविंद्र प्रसाद ने कहा, स्कूल कि एक शिक्षिका ने छात्राओं को प्रेरित करने के लिए मलाला यूसुफजई की तस्वीर विद्यालय में लगाई थी। शिक्षिका ने उनसे इजाजत ली थी। गांव वाले के विरोध के बाद स्कूल परिसर से मलाला की तस्वीर हटा दी गई।
कम उम्र में लड़कियों के हक के लिए लड़ीं
गांव के मुखिया ने आगे कहा कि, इसी वजह से उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से स्कूल से मलाला की तस्वीर हटवा दी. बता दें कि, मलाला यूसुफजई पाकिस्तान की एक समाजसेवी रह चुकी हैं. सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली महिला है. उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार साल 2014 में दिया गया था. काफी कम उम्र में ही मलाला ने लड़कियों के हक और शिक्षा की लड़ाई लड़ी थी. मलाला को मजबूत पाता देख तहरीक-ए-तालिबान के आतंकवादियों ने उन्हें 2012 में गोली मारी थी. वहीं मलाला आज काफी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी 12 जुलाई को मलाला दिवस मनाने की घोषणा भी है.
Report By :- RUCHI SINGH, NEWS DESK, NATION EXPRESS, रामगढ़