रांची की बेटी ने बताई आपबीती खौफ के साये में गुजर रही थी जिंदगी, हर धमाका तोड़ रहा था जिंदगी की सांसे, बोलते- बोलते मां से लिपट कर रोने लगी
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यूक्रेन से झारखंड लौटे स्टूडेंट्स की आपबीती:बोले- हर धमाका जीने की उम्मीद तोड़ रहा था; बंगाल का एक छात्र फंसा, पिता ने लगाई गुहार
रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे झारखंड और पश्चिम बंगाल के छात्र-छात्राओं की घर वापसी शुरू हो गई है। जिनके बच्चे अब भी विदेश में फंसे हुए हैं। वह केंद्र और राज्य सरकारों से लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। अपने बच्चों की सकुशल वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह कर रहे हैं। स्वदेश लौटे और यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राएं अपने संदेश में बेहद डरावनी हकीकत बयां कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि हर धमाका जीने की उम्मीद तोड़ने वाला है।
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रांची की बेटी ने बताई आपबीती
सेटलाइट कॉलोनी, रांची की अर्पिता प्रसाद यूक्रेन से सकुशल अपने घर रांची लौटी। वह जैसे ही रांची एयरपोर्ट के टर्मिनल से बाहर आई, मां से लिपट कर रोने लगी। मां ने बांहों में भर कर हिम्मत दी। अर्पिता के पिता उमेश प्रसाद ओडिशा बोलानी माइंस में सिविल इंजीनियर हैं। अर्पिता ने NATION EXPRESS से यूक्रेन के मौजूदा हालात पर बातचीत की। अर्पिता ने बताया, चार साल पहले मैं यूक्रेन के विनिस्तिया में मेडिकल की पढ़ाई करने गई थी। विनिस्तिया राजधानी कीव से 30 किमी दूर है। गुरुवार सुबह रूस ने विनिस्तिया एयरपोर्ट उड़ा दिया, उसके बाद मेरा और मेरे साथ हॉस्टल में रहनेवाले साथियों का पूरा समय बंकर में बीता।

हर धमाका जीने की उम्मीद तोड़ देता था। सोचती थी कि अब जीवित अपने वतन नहीं लौट पाऊंगी। धमाका इतना जोरदार होता था कि मैं रोने लगती थी। डर और खौफ के माहौल में चार दिन बीता। अर्पिता के अनुसार, शुक्रवार को इंडियन एंबेसी से फोन आया कि भारत लौटने के लिए तैयार हो जाएं। बस चालक ने रोमानिया बॉर्डर से 10 किमी पहले मुझे उतार दिया। रात ठंड में बीती। सुबह पैदल चल रोमानिया बॉर्डर पहुंचीं। वहां हजारों छात्र फंसे थे। वहां से मेरी भारत वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई।
पश्चिम बंगाल की छात्रा पहुंची स्वदेश
यूक्रेन में फंसी पश्चिम बंगाल की छात्र पर्णाश्री दास सकुशल स्वदेश लौट आई हैं। छात्रा को यूक्रेन से निकालकर भारत सरकार द्वारा पहले दिल्ली पहुंचाया गया। फिर दिल्ली से फ्लाइट के जरिए काजी नजरूल इस्लाम एयरपोर्ट अंडाल लाया गया। जहां पर SDM समेत प्रशासनिक अधिकारी की निगरानी में छात्रा पर्णाश्री दास को उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया। इस मौके पर अंडाल एयरपोर्ट पर उनके पिता नरेश चंद्र दास और उनके परिवार वालों समेत स्थानीय निवासियों ने पर्णाश्री दास को माला पहनाकर उनका स्वागत किया।

उखड़ा की रहने वाली पर्णाश्री दास ने कहा कि वहां के हालात बेहद खराब हैं। लगातार धमाकों की आवाज से लोग पूरी रात जाग कर गुजार रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी विदेशी नागरिकों को हो रही है। वह स्थानीय लोगों के मुकाबले ज्यादा डरे हुए हैं। यूक्रेन के लोग इन परिस्थितियों से डरने की बजाए लड़ने को तैयार हो चुके हैं।
चित्तरंजन का छात्र फंसा, पिता ने जारी किया संदेश
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धवान जिले में औद्योगिक शहर चित्तरंजन का छात्र उत्तम शर्मा यूक्रेन की राजधानी कीव में फंस गया है। वह यूक्रेन देश के कीव यूनिवर्सिटी से मेडिकल की शिक्षा पर अध्ययन करने गया है। वह पांचवें वर्ष का छात्र है। उत्तम रोजाना फोन और मैसेज के जरिए अपने परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। उनके पिता चिरेका कर्मी पशुपति शर्मा बिजली कार्यालय में मीटर रीडर हैं।

पशुपति शर्मा ने कहा कि वहां की स्थिति बहुत भयावह है। उनका बेटा दिन में किसी तरह फ्लैट में रहता है लेकिन रात में वह फ्लैट से दूर बंकर में चला जाता है। भले ही उनके फ्लैट सीधे तौर पर निशाना न हों, लेकिन लगातार कंपन हो रहा है। पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कोई बाहर नहीं निकल सकता। हालांकि, पानी और भोजन अभी उपलब्ध है। पशुपति शर्मा ने अनुरोध किया है कि सरकार किसी तरह उनके बेटे को भारत वापस लाने की व्यवस्था करे।
Report By : KHUSHBOO SHARMA, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI