बड़ा सवाल : मिशन 400 : आखिर 2024 में बड़े दावे करने वाला विपक्ष कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सामना कर पाएगा ? क्या है 2024 के लिए विपक्षी एकता का गेम प्लान
SPECIAL DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI
बीजेपी का नारा “अबकी बार 400 पार
दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बीजेपी ने अभी से तैयारी करनी शुरू कर दी है, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी मिशन 400 में जुट जाएगी। इसके लिए पूरी प्लानिंग सेट कर ली गई है. गृहमंत्री ने क्रोनोलॉजी बता दी है और 17 अगस्त से बीजेपी के नेता, मंत्री, पदाघिकारियों सहित कार्यकर्त्ता ड्यूटी में तैनात हो जाएंगे।
- Advertisement -
2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का रास्ता 2022 में होने वाले गुजरात, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद 2023 में प्रस्तावित राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव से होकर जाता है। लेकिन विपक्ष में आपसी सिर फुटौव्वल और घमासान मचा है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर 2024 में बड़े दावे करने वाला विपक्ष कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सामना कर पाएगा? कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि दिल्ली में बैठे नेताओं के लिए दिल्ली बहुत दूर है। दूसरी तरफ भाजपा के नेता आत्मविश्वास से लबरेज हैं। मोदी सरकार के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि आपको अमित शाह का वह बयान याद करना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि 2050 तक कोई नहीं है टक्कर में।
![]()
वह कसते हुए कहते हैं कि जो विपक्ष सर्वसम्मति से राष्ट्रपति का उम्मीदवार नहीं तय कर सका, उप-राष्ट्रपति के उम्मीदवार पर सिर फुटौव्वल है, वह कौन सी चुनौती खड़ी कर पाएगा? तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने अभी से उप-राष्ट्रपति चुनाव से किनारा कर लिया है। कांग्रेस पार्टी तो इसी से दोहरी हुई जा रही है कि अनियमितता के मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए बुलाया है। खैर, ऐसे मामलों में कांग्रेस पर हमला बोलना हो या चुटकी लेनी हो तो केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का आत्मविश्वास देखने लायक रहता है।
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने 400 सीटों का लक्ष्य रखा है, अब इस बार बीजेपी का नारा “अबकी बार 400 पार होगा’ इस नारे से कांग्रेस और विपक्ष का न्यारा-व्यारा करने का प्लान है. वर्तमान में बीजेपी के पास 303 लोक सभा सीटें हैं और NDA के पास टोटल 357 सीटें होती हैं. पिछली बार इन 144 सीटों में बीजेपी को हार मिली थी वहां अब पार्टी की ख़ास नज़र रहने वाली है.
बड़ा सवाल -कैसे फिक्स होते जा रहे हैं विपक्षी नेता?
भक्त चरण दास कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। विपक्षी एकता और 2024 के सवाल पर कहते हैं कि मौजूदा सरकार न केवल जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्ष को कमजोर करने, तोड़ने-फोड़ने में लगी है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को भी कमजोर करके बड़ा नुकसान कर रही है। इसलिए राष्ट्रहित में देश को बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों को साथ आना चाहिए। भक्त चरण ने कहा कि इसके लिए प्रयास चल रहा है। हालांकि विपक्षी एकता की तस्वीर न उभर पाने के सवाल पर वह कहते हैं कि उनकी कुछ सीमाएं हैं। वह नहीं बता सकते कि सब लोग कैसे फिक्स होते जा रहे हैं? मध्य प्रदेश कांग्रेस के अरुण यादव कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है। संघर्ष चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार संघर्ष कर रही हैं। इसका सुखद परिणाम आएगा।

अरुण यादव कहते हैं कि 2023 में हम मध्य प्रदेश जीतेंगे। 2022 में मेयर, जिला पंचायत, निकाय चुनावों में इसकी बानगी देखने को मिल गई है। इसके बाद अपने आप तस्वीर बदल जाएगी। समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर कहते हैं कि चुनौती बड़ी है। लेकिन इससे निबटने के लिए सभी दलों को खुलकर आगे आना होगा। लाठर को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी 2024 में अच्छी संख्या में सीटें लाएगी। तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने एक बार फिर एकला चलो रे का रास्ता पकड़ लिया है। वह उप-राष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष पर मनमाने तरीके से उम्मीदवार तय करने का आरोप लगाकर इससे किनारा कर चुकी हैं। वहीं ममता बनर्जी की पार्टी की एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि हमारा फोकस पश्चिम बंगाल पर है। वहां से भाजपा 2024 में एक-दो सीट जीत ले तो बड़ी बात होगी।
‘विपक्ष सोता है तो अमित शाह जागते रहते हैं’
विपक्ष के नेताओं से बात करने और अमित शाह की चर्चा करने पर कई बार ऐसा लगता है, जैसे उनके खिलाफ बोलने में वे डरते हैं। संभलकर बोलते हैं। भाजपा के भीतर और बाहर मीडिया में उन्हें राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। इस बारे में पश्चिम बंगाल के एक बड़े भाजपा नेता का कहना है कि अमित शाह की यही खूबी भाजपा की ताकत है। विपक्ष की कमजोरी भी। सूत्र का कहना है कि गृहमंत्री पूरी सतर्कता के साथ राजनीति के सभी प्रयोग, बड़ी सावधानी से करते हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल के मामले में पता है कि शाह बिना होमवर्क के कुछ नहीं करते। हवा में तो बिल्कुल नहीं। शाह का यह कौशल यूपी विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 दोनों में दिखाई दिया। संघ से भाजपा में आए ज्ञानेश्वर शुक्ला अमित शाह को इसका काफी बड़ा श्रेय देते हैं। कहते हैं कि कैसे जातिगत आधार पर जा चुके चुनाव का समीकरण बदलने में कामयाबी मिली थी। अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वह विपक्ष की कमजोरी ढूंढते रहते हैं। सत्ता पक्ष को मजबूत बनाने के सभी उपायों को लेकर गंभीर रहते हैं। इसके साथ-साथ उनकी निगाह आने वाली चुनौतियों पर बनी रहती है। इन सभी प्रयासों में राजनीतिक अवधारणा को एक फ्रेम में दुरुस्त करने के उपाय से वह कभी नहीं चूकते।
बीजेपी का मिशन 400 लोकसभा चुनाव 2019 में जिन सीटों में बीजेपी को हार मिली थी अब वहां बीजेपी गवर्नमेंट के मंत्री रहकर वहां की स्थिति और कमियों के साथ खामियों को समझेंगे और अपनी जीत दर्ज करने के लिए रणनीति बनाने का काम करेंगे। इस बार बीजेपी लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस सहित TMC, SHIVSENA, BSP, SP, और अन्य गुटों का सफाया करने की रणनीति बना रही है.
राष्ट्रपति चुनाव में खींच दी लकीर, बड़े अंतर से जीतीं द्रौपदी मुर्मू
अब राहुल गांधी के एजेंडे से आगे बढ़कर काम कर रही है भाजपा