रांची के नगड़ी में अनोखी मंडा पूजा के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए रांची के प्रसिद्ध समाजसेवी हुसैन खान
CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
नगड़ी के कोसारो गांव में मंडा पूजा समारोह धार्मिक अनुष्ठान लोटन सेवा, धुआं-सुआं, फूलखुंदी, झूलन, जतरा और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ संपन्न
मंडा पूजा का इतिहास काफी प्राचीन है। लोग बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत नागवंशी राजाओं ने की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, झारखंड में की जानेवाली मंडा पूजा भगवान भोले शंकर की पहली पत्नी सती के बलिदान की याद में की जाती है। मंडा पूजा करनेवाले भक्त इसे माता सती का आशीर्वाद मानते हैं।
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पाहन – महतो – कोटवार के द्वारा नगड़ी के कोसारो गांव में मंडा पूजा धूमधाम से मनाया गया। सात दिनों तक चलने वाले मंडा पूजा का रंगारंग कार्यक्रम और झूलन पूजा के साथ रविवार को संपन्न हो गया, समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर रांची के प्रसिद्ध समाजसेवी हुसैन खान शामिल हुए, कोसारो गांव के ग्रामीणों की ओर से धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंडा पूजा में भगवान शिव के उपासक ने शिव की पूजा कर उनकी आराधना की। पूजन के बाद शिव भक्तों ने फूलखुंदी, बनस झूला विधि को किया। इससे पहले शनिवार की रात धुवां, सुवा, फुलखूंदी और छावनी नृत्य का प्रदर्शन किया, कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रांची के प्रसिद्ध समाजसेवी हुसैन खान ने कहा कि मंडा पूजा से हमारी संस्कृति व परंपरा जुड़ी है। मंडा पूजा कर लोग गांव की खुशहाली और परिवार की समृद्धि की कामना करते है। शिव पार्वती के आस्था का महापर्व मंडा क्षेत्र के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। यह आस्था और विश्वास का प्रतीक है। जलते अंगारों में चलकर लोग अपने अटूट आस्था का परिचय देते हैं। उन्होंने कहा कि इस महापर्व में क्षेत्र के चौमुखी विकास और सुख समृद्धि की कामना करता हूं।

इससे पहले मंडा पूजा की शुरुआत 1 मई को हुई थी, 7 दिनों तक चलने वाले मंडा पूजा में पूरे झारखंड से तकरीबन लाखों लोग शामिल होते हैं नगड़ी में लगने वाला यह पूजा 1936 से किया जा रहा है उस गांव के रहने वाले लोगों के सहयोग से हर साल यह पूजा बहुत ही सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाया जाता है !
7 दिनों तक चलने वाले इस मंडा पूजा को समापन कराने में प्रसिद्ध समाजसेवी बजरंग कश्यप, प्रमुख मधुवा कश्यप, मुखिया अपर्णा खलखो की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है इसके अलावा विकास कश्यप और प्रशांत तिर्की ने भी मंडा पूजा को कामयाबी के शिखर तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, मंडा पूजा के समापन समारोह में रंगारंग कार्यक्रम के साथ साथ नागपुरी ऑर्केस्ट्रा पर लोग झूमते हुए नजर आए !

यहां दहकते अंगारों पर चलकर मांगी जाती हैं मन्नतें
भगवान भोले शंकर को अपनी भक्ति की शक्ति से खुश करने के लिए 7 दिनों की मंडा पूजा नगड़ी के कोसारो गांव में 1 मई को शुरू हुआ था। पूजा के दौरान बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक दहकते अंगारे पर चलते हैं। इससे पहले वे अंगार स्थल पर महादेव की पूजा व परिक्रमा करते हैं। दो तरह के लोग इस पूजा में शामिल होते हैं, एक तो वे जिन्हें मन्नत मांगनी होती है और दूसरे वे जिनकी मन्नत पूरी हो गई होती है। यह पूजा अच्छी बारिश की कामना के लिए भी की जाती है, ताकि परिवार सुख शांति से रहे। पूजा से पहले मुख्य पुजारी कलश का जल छिड़ककर सबकी शुद्धि करते हैं।

नगड़ी में भगवान शिव के भक्तों ने नंगे पांव दहकते अंगारों पर चलकर सदियों से चली आ रही भक्ति और परंपरा का निर्वहन किया। मंडा पूजा महोत्सव में देर रात तक नगड़ी में मेले और उत्सव सा माहौल रहा। अंगार पर चलने वाले भोक्ताओं को देखने के लिए रांची और नगड़ी के आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग यहां पहुंचे थे।

शाम होते ही मंदिर में शिव भोक्ता 21 बार आपस में गले मिले, फिर लोटन सेवा का अनुष्ठान हुआ। अब बारी थी धुवंसी (लपराभंज्जा) की। इसमें शिव भोक्ताओं को एक झूले में उल्टा लटका दिया गया। नीचे एक हवन कुंड निर्मित था। उस पर धुवन डालते हैं, इससे आग की लपट्टे निकलती है और यही उनकी अग्नि परीक्षा होती है। इस अनुष्ठान के बाद शिव भोक्ता दहकते अंगारों पर चलने को बेताब दिखे। मंदिर के पुजारी ने आग पर गंगा जल का छिड़काव कर मंत्र पढ़ा और भोक्ता नंगे पांव अंगारों पर चले।