ANJUMAN: बज गया चुनावी बिगुल, किसके हाथ लगेगी अंजुमन इस्लामिया की सत्ता? जोर आजमाइश में जुटे प्रत्याशी, अध्यक्ष के लिए इबरार अहमद, असलम परवेज, और हाजी मुख्तार के बीच होगा त्रिकोणीय और दिलचस्प मुकाबला
NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
अंजुमन इस्लामिया चुनाव की घोषणा आज कर दी गई 5 नवंबर को ही अंतिम निर्वाचन सूची का प्रकाशन कर दिया गया था और आज चुनाव की तारीख का ऐलान भी हो गया, 7 नवंबर सुबह 11 से 9 नवंबर शाम 4 बजे तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं जबकि 10 नवंबर को शाम 4 बजे तक स्क्रुटनी कर ली जाएगी 11 नवंबर को नाम वापस लेने की तिथि तय की गई है जबकि प्रत्याशियों को चुनाव चीन 12 नवंबर को आवंटित कर दिया जाएगा, 20 नवंबर शाम 7 बजे तक प्रचार-प्रसार खत्म हो जाएगा, अंजुमन इस्लामिया का चुनाव तीन चरणों में होगा 21 नवंबर 22 नवंबर और 23 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटर अपना वोट डाल सकते हैं 24 नवंबर को शाम 7 बजे से मतपत्रों की गिनती कर दी जाएगी , मदरसा इस्लामिया अप्पर बाजार रांची में मतदान एवं मतगणना स्थल बनाया गया है
नए-नए वादों की फुलझड़ी लगाई प्रत्याशियों ने
अंजुमन इस्लामिया के चुनाव की घोषणा होते ही सभी प्रत्याशी अपने वोटरों को रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं नए-नए वादों की फुलझड़ियां सजाई गई है प्रत्याशियों को रिझाने के लिए

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अंजुमन इस्लामिया रांची में फिर एक बार शाह और मात का खेल शुरू हो गया है। शाह और मात इसलिए कि इस पर आसिन होने के लिए इच्छुक व्यक्ति हर वह चीज करना चाहता है, जो सत्ता पाने का लोभी व्यक्ति करता है। यही कारण है कि इस पर काबिज होने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचे जाने लगे हैं। कोई किसी को कम नहीं आंक रहा है। समाजसेवा का जज्बा कूट-कूट कर बाहर आ रहा है। दरअसल, अंजुमन इस्लामिया रांची एक वक्फ संपित्त है और वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित है। इसकी देखरेख के लिए तीन वर्ष के लिए चुनाव के द्वारा प्रबंध समिति का चयन किया जाता है। लेकिन, यह अंजुमन का दुर्भाग्य रहा है कि जो भी यह चुनाव जीतकर आया, वह अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद भी यहां से नहीं जाना चाहता। संभवत: यही कारण है कि कई बार इस पर अवैध कब्जा करने की कोशिश भी कई लोगों द्वारा की गई है। वर्तमान परिस्थितियों की बात करें तो इस बार भी यह लड़ाई आर-पार होने वाली है। कोई षड्यंत्र करके सत्तारूढ़ होने के पक्षधर है तो कोई जनता के बीच जाकर निर्णायक लड़ाई लड़ने के पक्ष में है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो इस्लामिया की सारी बागडोर वक्फ बोर्ड के हाथों सौंपना चाहते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस शाह और मात के खेल में किसका बजेगा डंका और कौन किसे करेगा परास्त।
क्या है मामला
अंजुमन इस्लामिया के द्वारा मनोनित चुनाव संयोजक सैयद इकबाल प्रेस सम्मेलन करते हैं। इसमें वह जानकारी देते हैं कि उन्हें इस्लामिया द्वारा मार्च 2021 में चुनाव संयोजक मनोनित किया गया है और वह चुनाव कराने के संदर्भ में बात करना चाहते हैं। उनका इतना कहते ही सभागार में विरोध शुरू हो जाता है। पूर्व पार्षद असलम एवं संजू गुट समेत इस्लामिया के पूर्व सदस्य मो जबीउल्लाह सैयद इकबाल का विरोध करते हैं और उन्हें चुनाव संयोजक मानने से इनकार करते हैं। उनका पक्ष है कि तदर्थ कमिटी का कार्यकाल अप्रैल 2021 को समाप्त हो चुका है। उन्हें अपने कार्यकाल पूरा होने के छह माह पूर्व चुनाव संयोजक मनोनित करना था। यदि मार्च में चुनाव संयोजक को मनोनित किया गया था तो तीन माह तक स्वयं चुनाव संयोजक एवं तदर्थ कमिटी मौन क्यों थी। मीडिया अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से मार्च में इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
यदि इस विवाद को सुलझा लिया जाता है और लोग चुनाव में जाते हैं तो अंजुमन चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। पहला गुट इबरार अहमद का है, जो दो टर्म तक अध्यक्ष रह चुके हैं। वह जनता के बीच अपने अच्छे काम को लेकर जायेंगे और फिर से सेवा करने का अवसर मांगेगे। हालांकि उनके विरोधियों ने उनके लिए अभी से जाल बिछा रखा है, जिसमें उनके फंसने की संभावना है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इबरार अहमद इस्लामिया के अब तक के अध्यक्ष में सबसे सफल रहे हैं लेकिन उन पर जातिगत पक्ष लेने के अरोप समेत कई आरोप भी लगे हैं। स्वयं उनके कार्यकाल के महासचिव मोख्तार अहमद ने अंजुमन अस्पताल में हुई वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरा गुट प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ असलम परवेज का है। कयास लगाये जा रहे हैं कि वह इस बार अंजुमन चुनाव अवश्य लड़ेंगे। हालांकि गत चुनाव में भी उनके उतरने की संभावना थी लेकिन किन्ही कारणों से वह पीछे रहे। इस बार उनके उतरने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो वह इबरार गुट के लिए मुसीबत बन सकते हैं क्योंकि डॉ असलम की शहर और देही इलाकों में अलग पहचान है। वह लोगों की मदद के लिए जाने जाते हैं।
तीसरा गुट हाजी मुख्तार का है हाजी मुख्तार को अंजुमन इस्लामिया में काम करने का लंबा अनुभव है क्योंकि इससे पहले हाजी मुख्तार इबरार अहमद गुट में महासचिव के पद पर काम कर चुके हैं अपने क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की आवश्यकता पर इन्होंने काफी सराहनीय कार्य कर दिखाया है। कोविड काल में संपूर्ण लॉकडाउन के समय हाजी मुख्तार द्वारा किये गये कार्य की आज भी मुस्लिम चौक-चौराहों पर सराहना की जाती है।
अंजुमन इस्लामिया के बड़े सवाल
-मनोनित चुनाव संयोजक सैयद इकबाल अंजुमन अस्पताल में प्रमुख पद पर कार्यरत हैं जबकि अंजुमन इस्लामिया के किसी भी संपत्ति में कार्यरत पदधारी चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता। पिछली बार हसीब अख्तर को इसी कारण से चुनावी प्रक्रिया से अलग किया गया था।
-अंजुमन चुनाव में विवाद होता रहा है। कई बार बात धक्का-मुक्की और मारपीट तक जा पहुंची है। ऐसे में काफी बुजुर्ग सैयद इकबाल का चुनाव संयोजक के रूप में चयन किया जाना क्या न्यायोचित है। यदि किसी प्रकार के हंगामें से उनके स्वास्थ्य को कुछ होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेवार होगा।
-तदर्थ कमिटी को वक्फ बोर्ड से अब तक अप्रुवल नहीं मिला है। ऐसे में उनके द्वारा चुनाव संयोजक अपने कार्यकाल के समाप्त होने के एक माह पूर्व मनोनित करना संदेहास्पद है। यह सूचना भी तीन माह तक छिपाये रखा गया।
-तदर्थ कमिटी द्वारा अब तक संपूर्ण आय-व्यय का ब्यौरा वक्फ बोर्ड को नहीं दिया जाना और अंशदान की राशि से भी वक्फ बोर्ड को वंचित रखना आदि।-
Report By :- SHADAB KHAN, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
अंजुमन इस्लामिया चुनाव की घोषणा आज कर दी गई 5 नवंबर को ही अंतिम निर्वाचन सूची का प्रकाशन कर दिया गया था और आज चुनाव की तारीख का ऐलान भी हो गया, 7 नवंबर सुबह 11 से 9 नवंबर शाम 4 बजे तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं जबकि 10 नवंबर को शाम 4 बजे तक स्क्रुटनी कर ली जाएगी 11 नवंबर को नाम वापस लेने की तिथि तय की गई है जबकि प्रत्याशियों को चुनाव चीन 12 नवंबर को आवंटित कर दिया जाएगा, 20 नवंबर शाम 7 बजे तक प्रचार-प्रसार खत्म हो जाएगा, अंजुमन इस्लामिया का चुनाव तीन चरणों में होगा 21 नवंबर 22 नवंबर और 23 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटर अपना वोट डाल सकते हैं 24 नवंबर को शाम 7 बजे से मतपत्रों की गिनती कर दी जाएगी , मदरसा इस्लामिया अप्पर बाजार रांची में मतदान एवं मतगणना स्थल बनाया गया है