अंजुमन इस्लामिया चुनाव 2022 : मुस्लिम कौम के लिए हर कदम पर खड़े रहने वाले हाजी मुख्तार अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार, इबरार अहमद से पूरी मुस्लिम कौम नाराज
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रांची में जिस तरह का बवाल शुक्रवार को हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन इसे रोका भी जा सकता था अगर एन वक्त पर मुस्लिम कौम के बड़े लीडर मौके पर मौजूद रहते तो शायद इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था लेकिन रांची के मुसलमानों का मानना है कि अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष इबरार अहमद इतनी बड़ी घटना के बावजूद झांकने तक नहीं आए जिस समय मुस्लिम कौम को एक रहनुमा की जरूरत थी उस वक्त अध्यक्ष इबरार अहमद इसी कमरे में बड़े आराम से चैन की नींद सो रहे थे अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कर्बला चौक में हुई युवक की मौत के बाद जब अध्यक्ष इबरार अहमद पहुंचे तो वहां के लोगों में अच्छी खासी नाराजगी देखी गई और अबरार अहमद वापस जाओ के नारे भी लगाए गए कुछ लोगों का कहना है कि तो वहां के स्थानीय लोगों में गुस्सा इतना था कि जिस समय गोलियां चल रहे थे उस समय आखिर इबरार अहमद घटनास्थल पर क्यों नहीं आए मुसलमानों का साथ देने यही वजह है कि गोली कांड में शहीद हुए युवक के घर पहुंचे इबरार अहमद के साथ वहां के स्थानीय लोगों ने काफी धक्का-मुक्की की जिसके बाद उन्हें वापस जाना पड़ा लेकिन अगर हम बात करें अंजुमन इस्लाम चुनाव के अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हाजी मुख्तार की जिन्होंने अपना पूरा समय घटनास्थल से लेकर थाने में एफ आई आर तक करने में बिताया मुस्लिम कौम के सहे रहनुमा हाजी मुख्तार ही है अलग-अलग तंजीम ओके लोगों का कहना है कि हाजी मुख्तार एक अच्छे और सुलझे इंसान है जब-जब कौन-कौन की जरूरत पड़ी है वह हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर मुसलमानों का साथ देते हैं रांची में उपद्रव के बाद भी शांति व्यवस्था बहाल करने में पीड़ित परिवार से मिलने में उन्हें इंसाफ दिलाने में वे दिन रात एक कर दिए और मेहनत करके उसे अंजाम तक पहुंचा रहे हैं लोगों का मानना है कि अध्यक्ष पद के लिए हाजी मुख्तार को ही हम वोट देंगे और उन्हें ही जीतकर अंजुमन इस्लामिया क्या नया अध्यक्ष बनाएंगे
रांची अंजुमन का चुनाव का बिगुल बज चुका है ऐसे में सभी लोग एक दूसरे पर जुबानी जंग कर रहे हैं जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी नए-नए हथकंडे और दाम अपना रहे हैं पिछले दो बार से अंजुमन का चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने इबरार अहमद को लोग इस बार नकार रहे हैं वजह साफ है कि जब भी मुसलमानों की रहनुमाई की बात आती है तब इबरार अहमद के कदम पीछे हो जाते हैं लॉकडॉन का मामला हो एनआरसी और एनआरपी का मामला जब भी मुसलमानों को एक प्लेटफार्म पर लाने की बात आती थी तो अंजुमन के अध्यक्ष इबरार अहमद अपने आपको यह सब से अलग कर देते थे !
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अभी कई मामले ऐसे आए जिससे रांची के मुसलमानों के दिल में इबरार अहमद के लिए खराब छवि बन चुकी है इबरार अहमद की टीम में हाजी मुख्तार ने भी खुद को इबरार की टीम से अलग कर लिया है और वह इस बार अंजुमन के अध्यक्ष पद के लिए चुनावी मैदान में खड़े हैं हाजी मुख्तार की छवि साफ-सुथरी है और जब भी मुसलमानों को उनकी जरूरत होती है वह हर जगह मौजूद रहते हैं चाहे खुशी हो चाहे गम हो हाजी मुख्तार गरीबों की सेवा में तत्पर रहते हैं , झारखंड के राजधानी रांची में जब भी संप्रदायिक मामला हुआ है उसको शांत कराने में हाजी मुख्तार का अहम रोल रहा है, वह हमेशा मुसलमानों के लिए तत्पर रहते हैं!

हाजी मुख्तार ने नेशन एक्सप्रेस से खास बातचीत में कहा कि वह इस बार अंजुमन के अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार है और राज्य के तमाम मुसलमानों का साथ उन्हें मिल रहा है उन्होंने कहा कि पिछले दो बार में नायब सदर रहते हुए कई अधूरे काम थे जो अध्यक्ष बनने के बाद मैं उसे जरूर पूरा करूंगा ! हाजी मुख्तार ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इबरार गुट को छोड़ा है और उन्होंने किसी से बगावत नहीं किया है यह उनकी अपनी मर्जी है और वे इस बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं !
Report By :- SHIVANI SINGH, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
रांची में जिस तरह का बवाल शुक्रवार को हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन इसे रोका भी जा सकता था अगर एन वक्त पर मुस्लिम कौम के बड़े लीडर मौके पर मौजूद रहते तो शायद इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था लेकिन रांची के मुसलमानों का मानना है कि अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष इबरार अहमद इतनी बड़ी घटना के बावजूद झांकने तक नहीं आए जिस समय मुस्लिम कौम को एक रहनुमा की जरूरत थी उस वक्त अध्यक्ष इबरार अहमद इसी कमरे में बड़े आराम से चैन की नींद सो रहे थे अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कर्बला चौक में हुई युवक की मौत के बाद जब अध्यक्ष इबरार अहमद पहुंचे तो वहां के लोगों में अच्छी खासी नाराजगी देखी गई और अबरार अहमद वापस जाओ के नारे भी लगाए गए कुछ लोगों का कहना है कि तो वहां के स्थानीय लोगों में गुस्सा इतना था कि जिस समय गोलियां चल रहे थे उस समय आखिर इबरार अहमद घटनास्थल पर क्यों नहीं आए मुसलमानों का साथ देने यही वजह है कि गोली कांड में शहीद हुए युवक के घर पहुंचे इबरार अहमद के साथ वहां के स्थानीय लोगों ने काफी धक्का-मुक्की की जिसके बाद उन्हें वापस जाना पड़ा लेकिन अगर हम बात करें अंजुमन इस्लाम चुनाव के अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हाजी मुख्तार की जिन्होंने अपना पूरा समय घटनास्थल से लेकर थाने में एफ आई आर तक करने में बिताया मुस्लिम कौम के सहे रहनुमा हाजी मुख्तार ही है अलग-अलग तंजीम ओके लोगों का कहना है कि हाजी मुख्तार एक अच्छे और सुलझे इंसान है जब-जब कौन-कौन की जरूरत पड़ी है वह हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर मुसलमानों का साथ देते हैं रांची में उपद्रव के बाद भी शांति व्यवस्था बहाल करने में पीड़ित परिवार से मिलने में उन्हें इंसाफ दिलाने में वे दिन रात एक कर दिए और मेहनत करके उसे अंजाम तक पहुंचा रहे हैं लोगों का मानना है कि अध्यक्ष पद के लिए हाजी मुख्तार को ही हम वोट देंगे और उन्हें ही जीतकर अंजुमन इस्लामिया क्या नया अध्यक्ष बनाएंगे