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सरकार कि आमद मरहबा से गूंजा रांची : शान व शौकत से मनाया गया ईद मिलादुन्नबी, गली से लेकर मोहल्ले तक पैग़म्बर मोहम्मद के सीरत पर हुआ बयान

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शान व शौकत से मनाया जा रहा है ईद मिलादुन्नबी

अपने अपने मोहल्ले में निकला जुलूस ए मोहम्मदी

घर घर हुई फातेहा खानी, सुबह से शाम तक चलता रहा लंगर

खानकाहों, मस्जिदो में होती रही पैग़म्बर मोहम्मद के सीरत पर बयान

झारखंड समेत राजधानी में ईद मिलादुन्नबी का पर्व सादगी के साथ मनाया जा रहा है. गली-मोहल्लों को दुल्हन की तरह सजाया गया है. रंग-बिरंगे लाइट्स मस्जिदों के मिनारों को चार-चांद लगा रहे. झंडों से मोहल्लों की खूबसूरती देखती बन रही है. छोटे-छोटे बच्चे कुर्ता-पायजामा पहनकर ईद मिलादुन्नबी पर्व की शोभा बढ़ा रहे हैं. वहीं, घर में महिलाएं तरह-तरह की पकवानें बनाने में व्यस्त हैं. नाते मुस्तफा का खूब-खूब एहतमाम हो रहा है.

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मिलाद शरीफ का एहतेमाम किया गया     
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर खानकाह मजहरिया मुनअमिया फिरदौस नगर डोरंडा मे मिलाद शरीफ का एहतेमाम खानकाह के सज्जादा नशी मौलाना सैयद शाह अल्कमा शिबली के द्वारा किया गया. जिसमे हुजूरे पाक की यौमे पैदाइश का वाक्या, ईद मिलादुन्नबी क्यू मानते है, अपनी उम्मत को सही राह पर चलने और सच्चाई ईमानदारी की साथ जिंदगी बशर करने व नेक काम और नेक लोगों के साथ रहने, गरीबों को मदद का संदेश दिया  गया. मौके पर मौलाना सैयद अबू राफे तिबरानी, हेजाजी, हम्मादी, मिरकात, राईका, राकिया, माशिया, मो शब्बीर, मो रहमत अली, सेराज, अदनान आदि शामिल थे. 
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खुशियां मनाने का हुक्म अल्लाह ने कुरान में दिया
12 रबी उल अव्वल हजरत पैगंबर साहब का जन्म दिवस है. इस अवसर पर खुशियां मनाने का हुक्म अल्लाह ने कुरान में दिया. मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने कहा कि एदार ए शरीया के ऐलान के मुताबिक राज्य भर में आज ईद मिलादुन्नबी मनाई जा रही है. एदार ए शरीया झारखंड ईद मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर एक गाइडलाइन भी जारी किया है. इस्लाम में 12 रबी उल अव्वल ईद मिलादुन्नबी दोनों ईदों से अफजल है. यह एक बड़ा त्यौहार है.
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मोहम्मद साहब के जन्मदिन को पर्व के रूप में मनाया जाता है
हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन को पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस पर्व को बारावफात या ईद मिलादुन्नबी कहते हैं. इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर मस्जिदों में इबादत करते हैं और जलसा का भी आयोजन करते है. इसमें मोहम्मद साहब की शान में नज़्म पढ़े जाते हैं. मस्जिद व घरों में कुरान को खास तौर पर पढ़ा जाता है. पैगंबर मोहम्मद का जन्म अरब के शहर मक्का में 570 ईस्वी में हुआ था. मोहम्मद साहब आखिरी नबी हैं. इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने की 12वीं तारीख को पड़ता है. रबी अव्वल की 12वीं तारीख को ही मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था. इसीलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन को बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं.

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सुन्नी बरैलवी सेन्ट्रल कमिटी की गाइडलाइन

1,,,बा वजू साफ -सुथरा और पाकीज़ा लिबास पहनकर,खुशबू लगा कर बाअदब जुलूस में शामिल हों।
2,,,सर पर अमामा शरीफ सजाएँ या कम से कम टोपी जरूर पहन लें,नंगेथ सर हरगिज़ नही रहें I
3,,,लब पर दरूद पाक का विर्द रखें,नात पाक पढ़ते चलें,गैर जरूरी गुफ़्तगू से परहेज़ करें।
04,,,ओलमाए अहले सुनन्त के आदाब मलहुज़ रखते हुए इनकी कयादत में चलें इनसे आगे न निकले।
05,,,डी, जे,साउंड सिस्टम का इस्तेमाल ना करें ,हल्के मोहज्जब आवज के साउंड का इस्तेमाल करें जिसमें नाते नबी पढ़ा जा रहा हो।
06,,,जुलूस में बद नजमी से खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं।
07,,,जुलूस में बंटने वाले तबर्रूख का एहतराम करें और उसे बरबाद होने से बचाएं।
08,,, बाहम अखुवत व मोहब्बत और जज्बये खैर सेगाली का इजहार करते हुए हत्तल इम्कान जरूरत मंदों की इमदाद करें।
09,,, वक्क्त की पांबन्दी के साथ अपने अपने मुहल्ले में निकलें ताकि जोहर की नमाज़ वक्क्त पर अदा कर सकें।
10,,,राहगीरों,मुसाफिरों,बिरदराने वतन का ख्याल रखें,अपने किसी अमल से उन्हें तकलीफ न पहुचाएं, कानूनी शिकनी से बचें और नज्म जब्त बरकरार रखने में जिला प्रशासन की मदद करें।
11,,,,अपने अपने इलाके में साफ- सफ़ाई का खुसूसी एहतेमाम करें।
12,,, अपने मोहल्ले के गली- कूचों को कुम कुमों और झण्डे बैनर से सजाएं I इस्तकबाल ए ईद मिलादुन्न नबी के लिये जगह जगह बैनर ,झंडे, गेट लगाए जाएं कोई ऐसा नारा ना लगाएं जिस से दूसरे अकयाद या मज़हब के लोगों को तकलीफ हो।अगर आपस में नाइत्तेफाकी हो तो उससे दूर होकर एक दूसरे के बीच मोहब्बत का पैगाम दें।

Report By :- KHUSHBOO SHARMA, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

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