सरकार कि आमद मरहबा से गूंजा रांची : शान व शौकत से मनाया गया ईद मिलादुन्नबी, गली से लेकर मोहल्ले तक पैग़म्बर मोहम्मद के सीरत पर हुआ बयान
NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
शान व शौकत से मनाया जा रहा है ईद मिलादुन्नबी
अपने अपने मोहल्ले में निकला जुलूस ए मोहम्मदी
घर घर हुई फातेहा खानी, सुबह से शाम तक चलता रहा लंगर
खानकाहों, मस्जिदो में होती रही पैग़म्बर मोहम्मद के सीरत पर बयान
झारखंड समेत राजधानी में ईद मिलादुन्नबी का पर्व सादगी के साथ मनाया जा रहा है. गली-मोहल्लों को दुल्हन की तरह सजाया गया है. रंग-बिरंगे लाइट्स मस्जिदों के मिनारों को चार-चांद लगा रहे. झंडों से मोहल्लों की खूबसूरती देखती बन रही है. छोटे-छोटे बच्चे कुर्ता-पायजामा पहनकर ईद मिलादुन्नबी पर्व की शोभा बढ़ा रहे हैं. वहीं, घर में महिलाएं तरह-तरह की पकवानें बनाने में व्यस्त हैं. नाते मुस्तफा का खूब-खूब एहतमाम हो रहा है.
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सुन्नी बरैलवी सेन्ट्रल कमिटी की गाइडलाइन
1,,,बा वजू साफ -सुथरा और पाकीज़ा लिबास पहनकर,खुशबू लगा कर बाअदब जुलूस में शामिल हों।
2,,,सर पर अमामा शरीफ सजाएँ या कम से कम टोपी जरूर पहन लें,नंगेथ सर हरगिज़ नही रहें I
3,,,लब पर दरूद पाक का विर्द रखें,नात पाक पढ़ते चलें,गैर जरूरी गुफ़्तगू से परहेज़ करें।
04,,,ओलमाए अहले सुनन्त के आदाब मलहुज़ रखते हुए इनकी कयादत में चलें इनसे आगे न निकले।
05,,,डी, जे,साउंड सिस्टम का इस्तेमाल ना करें ,हल्के मोहज्जब आवज के साउंड का इस्तेमाल करें जिसमें नाते नबी पढ़ा जा रहा हो।
06,,,जुलूस में बद नजमी से खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं।
07,,,जुलूस में बंटने वाले तबर्रूख का एहतराम करें और उसे बरबाद होने से बचाएं।
08,,, बाहम अखुवत व मोहब्बत और जज्बये खैर सेगाली का इजहार करते हुए हत्तल इम्कान जरूरत मंदों की इमदाद करें।
09,,, वक्क्त की पांबन्दी के साथ अपने अपने मुहल्ले में निकलें ताकि जोहर की नमाज़ वक्क्त पर अदा कर सकें।
10,,,राहगीरों,मुसाफिरों,बिरदराने वतन का ख्याल रखें,अपने किसी अमल से उन्हें तकलीफ न पहुचाएं, कानूनी शिकनी से बचें और नज्म जब्त बरकरार रखने में जिला प्रशासन की मदद करें।
11,,,,अपने अपने इलाके में साफ- सफ़ाई का खुसूसी एहतेमाम करें।
12,,, अपने मोहल्ले के गली- कूचों को कुम कुमों और झण्डे बैनर से सजाएं I इस्तकबाल ए ईद मिलादुन्न नबी के लिये जगह जगह बैनर ,झंडे, गेट लगाए जाएं कोई ऐसा नारा ना लगाएं जिस से दूसरे अकयाद या मज़हब के लोगों को तकलीफ हो।अगर आपस में नाइत्तेफाकी हो तो उससे दूर होकर एक दूसरे के बीच मोहब्बत का पैगाम दें।
Report By :- KHUSHBOO SHARMA, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI