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जेएमएम प्रवक्ता के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा नेता अजय साह ने झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के बयान को झारखंड में उपद्रव भड़काने की साजिश करार दिया है. वक्फ बिल का विरोध करने पर उन्होंने झामुमो को आदिवासी विरोधी करार दिया है.
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने जेएमएम द्वारा वक़्फ़ बिल पर की गई प्रेस वार्ता पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएमएम की यह प्रेस वार्ता उपद्रवियों को उकसाने के इरादे से की गई है। अजय साह ने कहा कि जेएमएम प्रवक्ता द्वारा यह दावा किया जाना कि चैत्र नवरात्रि के दौरान माहौल बिगड़ सकता है, यह संकेत देता है कि सरकार उपद्रवियों के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में शिवरात्रि, होली और सरहुल के दौरान भी हिंसा के मामले सामने आए थे और अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि रामनवमी के अवसर पर भी माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। उपद्रवियों को चेतावनी देने के बजाय, उनके हिंसक कृत्यों का समर्थन करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
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कांग्रेस सरकारों ने वक्फ कानून बनाये, तब राज्यों की शक्तियों का क्या हुआ? – साह
अजय साह ने कहा कि 1954, 1995 और 2013 में कांग्रेस की सरकारों ने वक्फ कानून बनाये, तब राज्यों की शक्तियों का क्या हुआ? जब एक खास वर्ग को खुश करने के लिए कानून बनाया जाता है, तो जेएमएम को कोई समस्या नहीं होती, लेकिन जब भाजपा तुष्टिकरण के खिलाफ देशहित में जमीन बचाने के लिए कानून लाती है, तो वे संविधान की दुहाई देने लगते हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह कानून राज्यों के अधिकारों को और मजबूती देता है. राज्य की शक्तियों को कमजोर नहीं करता.

झारखंड में वक्फ संपत्तियों के नाम पर बड़ी गड़बड़ियां सामने आयेंगी – अजय साह
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि निष्पक्ष जांच हो, तो झारखंड में वक्फ संपत्तियों के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर होंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में वक्फ की जमीन का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ साधने और राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. यह समझना मुश्किल नहीं है कि इनसे किन पार्टियों को लाभ हो रहा है.
भाजपा ने जेएमएम पर लगाया आदिवासी विरोधी रुख अपनाने का आरोप
अजय साह ने जेएमएम पर आदिवासी विरोधी रुख अपनाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जेएमएम खुद को आदिवासियों का हितैषी बताती है, लेकिन अब उस वक्फ बिल के साथ खड़ी है, जो अनुसूचित क्षेत्र (शेड्यूल-5) के तहत आदिवासियों की जमीनों को वक्फ के नाम पर भू-माफियाओं के कब्जे से बचाने का काम करता है. हेमंत सोरेन सरकार को चाहिए कि वह वक्फ के नाम पर हड़पी गयी आदिवासी जमीनों की जांच कराये और नये कानून के तहत सख्त कार्रवाई करके आदिवासियों को उनका अधिकार लौटाये.
Report By :- AAKANSHA TIWARI, POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI