रांची महानगर कांग्रेस कमिटी अल्पसंख्यक विभाग ने आयुक्त को सौंपा ज्ञापन : हुसैन खान ने मणिपुर और हरियाणा सरकार को अविलम्ब बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की
POLITICAL DESK, NATION EXPRESS, रांची
रांची महानगर कांग्रेस कमिटी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष अख्तर अली के नेतृत्व में आयुक्त दक्षिणी छोटानागपुर प्रमण्डल, रॉंची को ज्ञापन दिया गया जिसमें मणिपुर राज्य में विगत् तीन महीनों से जारी जातीय हिंसा और हरियाणा में सांप्रदायिक दंगे पर हस्तक्षेप करते हुए हिंसा पर रोक लगाने एवं शांति व्यवस्था बहाल करने तथा तत्काल मणिपुर,हरियाणा सरकार को बर्खास्त करने के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया मणिपुर राज्य विगत 3 मई 2023 से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। बावजूद इसके हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है तथा अब तक मणिपुर में चल रही जातीय हिंसा को रोकने में पूर्णतः नाकाम रही है। मणिपुर में भीड़ द्वारा महिलाओं को नंगा कर उनके शरीर के साथ दुर्व्यवहार करने का शर्मनाक वीडियो के वायरल होने के बाद पूरा देश शर्मशार हुआ।

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यह अत्यंत चिंता का विषय है कि जातीय हिंसा के कारण सैंकड़ों आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी एवं हजारों की संख्या में अल्पसंख्यक, ईसाई समुदाय राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं या पलायन करने को मजबूर हैं। देश में आज अल्पसंख्यको का वजूद खतरे में है, आज अल्पसंख्यक अपनी संस्कृति, धार्मिक पहचान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो संविधान में नागरिकों के लिए धारा-29 (1) के तहत संरक्षण देती है। इसके बावजूद केन्द्र सरकार द्वारा संसद में मणिपुर की घटना पर कोई चर्चा नहीं की जा रही है और न हीं हिंसा रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। कुछ दिन पहले हरियाणा के नुह में हिंसक झड़प हुआ उस झड़प की आग ने हरियाणा में ही एक मंजिद के इमाम की जान ले लिया और न जाने कितने लोग घायल हुए हरियाणा पुलिस हिंसा को रोकने में नकामयाब रही, महाराष्ट्र जयपुर एक्सप्रेस में रेल के डब्बे में एक आरपीएफ के जवान ने अपने सिनियर एवं तीन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अपनी सर्विस बंदूक की गोलियों से भून दिया। देश का महौल बद से बतर होती जा रही है। आपसी भाईचारा, आपसी सौहार्द बिलकुल खत्म होने के कगार पर है। इस तरह की घटनाए होती है तो पुरी जिम्मेदारी सरकार की होती है। कहीं न कहीं इस सारी घटनाओं को रोकने में दोनों राज्य सरकारे नाकामयाब रही।
