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सरफराज अहमद बने झारखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ! शम्स कमर लड्डन समेत कई लोगों ने दी जीत की बधाई

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नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ सरफराज अहमद  के सामने वक्फ संपत्ति  को बचाना सबसे बड़ी चुनौती

राज्यसभा सांसद डॉ सरफराज अहमद झारखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष चुने गये हैं. अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में सरफराज अहमद ने एक वोट से अपने निकटम प्रतिद्वंदी अबरार अहमद को शिकस्त दी. सरफराज को कुल पांच वोट मिले. जबकि अबरार को चार वोट मिले.

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साल 2019 में झामुमो के टिकट पर गांडेय सीट से जीता था चुनाव

बताते चलें कि डॉ सरफराज अहमद वर्ष 2019 में झामुमो के टिकट पर गांडेय सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे. बाद में उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया. इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें कल्पना सोरेन ने जीत हासिल की. डॉ सरफराज वर्ष 1980 और 2009 में भी कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं.

झारखंड में वक्फ बोर्ड की हालत:

लंबे समय बाद वक्फ अधिनियम 1995 यथा संशोधित अधिनियम 2013 की धारा 14(1) तथा 14(3) के शक्तियों का प्रयोग करते हुए झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड में निम्न सदस्यों को नियुक्त किया गया था। झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड में राज्यसभा सांसद डॉ सरफराज अहमद, पूर्व विधायक मो निजामुद्दीन अंसारी, अधिवक्ता एके रशीदी, मो फैजी, महबूब आलम, इबरार अहमद, सैयद तहजीबुल हसन, शकील अख्तर, कार्मिक प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के संयुक्त सचिव आसिफ हसन को नामित किया गया है. इसी के तरह झारखंड राज्य हज समिति में राज्य सरकार के दो मंत्री, एक राज्यसभा सदस्य सहित 15 सदस्य को शामिल किया गया है.

वक्फ की संपत्ति :

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पूर्व रिकॉर्ड के मुताबिक झारखंड में करीब 206 वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताई जाती है, कुछ मदरसा, ईदगाह , कब्रिस्तान, अस्पताल, स्कूल,कालेज इत्यादि हैं। कुछ जानकार बताते हैं कि वक्फ की कुछ संपत्तियों का कुछ जानकारों ने गलत तरीके से ट्रस्ट बना लिए हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। साथ ही वक्फ संपत्ति के रख रखाव, अकाउंट ऑडिट, अवैध कब्जा,विवाद, सर्वे, रजिस्ट्रर्ड कराने के अलावा बकाया किरायेदारों जैसे कई और समस्याएं हैं। करोड़ों राशि की वक्फ संपत्ति बावजूद मुसलमानों की हालत बदतर है।

वक्फ के बारे में :

1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ एक्ट 1954) पास किया गया, जिसका मकसद वक्फ से जुड़े कामकाज को सरल बनाना और तमाम प्रावधान करना था। प्रावधानों के मुताबिक साल 1964 में अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन केंद्रीय वक्फ परिषद का गठन हुआ। साल 1995 में वक्फ एक्ट में बदलाव भी किया गया और हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ बोर्ड बनाने की अनुमति दी गई।

वक्फ बोर्ड के पास कितनी संपत्ति:

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वक्फ बोर्ड जमीन के मामले में रेलवे और कैथोलिक चर्च के बाद तीसरे नंबर पर है। पूर्व आंकड़ों के मुताबिक वक्फ बोर्ड के पास 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है। 2009 में यह जमीन 4 लाख एकड़ हुआ करती थी, जो कुछ सालों में बढ़कर दोगुनी हो गई है। इन जमीनों में ज्यादातर मस्जिद, मदरसा, ईदगाह,कब्रगाह आदि हैं। दिसंबर 2022 तक वक्फ बोर्ड के पास करीब 8,65,644 अचल संपत्तियां थीं।वक्फ बोर्ड को ज्यादातर संपत्तियां मुस्लिम शासनकाल में मिलीं। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर विवाद नया नहीं हैं। अंग्रेजों के जमाने से लड़ाई चलती आ रही है। यह लंदन स्थित प्रिवी काउंसिल तक पहुंचा। इसके बाद ब्रिटेन में चार जजों की बेंच बैठी और वक्फ को अवैध करार दे दिया। हालांकि इस फैसले को ब्रिटिश भारत की सरकार ने नहीं माना। मुसलमान वक्फ वैलिडेटिंग एक्ट 1913 लाकर वक्फ बोर्ड को बचा लिया।वक्फ एक्ट के सेक्शन 85 में कहा गया है कि बोर्ड के फैसले को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी जा सकती।

Report By :- PALAK TIWARI, CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

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