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मुसलमानों को सियासी मोहरा बनाकर राजनीतिक स्वार्थ साधा जा रहा है: इबरार अहमद

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NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

 मजलिस (मुस्लिम एसोसिएशन फॉर जस्टिस लिटरेसी एण्ड सोशल एवारनेस) झारखंड के तत्वाधान में  मेन रोड स्थित रहमानिया मुसाफिरखाना, सभागार अंजुमन इस्लामिया रांची परिसर में विभिन्न मुस्लिम संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक आवश्यक आम बैठक अंजुमन इस्लामिया, रांची के अध्यक्ष श्री इबरार अहमद की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मौलाना तौफ़ीक अहमद क़ादरी ने भाग लिया। इस बैठक में रांची शहर एवं निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधि एवं सामाजिक संस्थाओं के अगुआ भाग लिये। मजलिस द्वारा आयोजित बैठक में झारखंड के अल्पसंख्यकों, विशेष कर मुसलमानों की मूलभूत बुनियादी समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया।

विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा मुसलमानों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, विभिन्न सरकारी बोर्ड, निगम, आयोग, विश्वविद्यालयों में सहभागिता एवं बैंक ऋण सुविधाओं आदि पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों के द्वारा दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है जैसा कि विगत दिनों विधानसभा सत्र के दौरान जो हंगामा देखा गया। बैठक को संबोधित करते हुए अंजुमन इस्लामिया रांची के अध्यक्ष श्री इबरार अहमद ने कहा कि मुसलमानों को राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है और इन्हें ग़ैर जरूरी मुद्दों में उलझा कर पूरे समाज को दिगभ्रमित किया जाता है एवं भेदभाव पैदा करने की कोशिश करते हुए नफरत एवं आपसी सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है।

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श्री अहमद ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि मुसलमानों को सियासी मोहरा बनाकर अपना राजनीतिक स्वार्थ साधा जा रहा है। कुछ राजनीतिक पार्टी की पूरी राजनीति ही मुस्लिम विरोध पर केन्द्रित है परन्तु जो सेकुलर पार्टियां हैं वे भी मुस्लिम समाज की बुनियादी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं कर रही है। झारखंड गठन के बाद से आज तक केवल मुसलमानों को राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल किया गया है। श्री इबरार अहमद ने कहा कि अगर धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है तो धर्म के आधार पर किसी को आरक्षण से वंचित भी नहीं किया जाना चाहिए लेकिन मुस्लिम समाज की कुछ जातियों को धर्म के आधार पर शिड्यूल कास्ट में शामिल नहीं किया गया, इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए जैसे हव्वारी, इब्राहीमी, हलालखोर इत्यादि। एस० अली अंजुमन इस्लामिया के माँग को दोहराते हुए कहा कि झारखंड सरकार मौलाना आजाद के नाम पर कल्चरल एण्ड एजुकेशनल सेंटर के लिए पांच एकड़ जमीन अंजुमन को दे। आर्यन हेल्पलाईन के मून ने कहा कि झारखंड का मुस्लिम समाज मोबलिंचिग का शिकार है। मोबलिंचिंग में मारे गए लोगों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया और ना ही मोबलिंचिंग में शामिल दोषी अपराधियों के विरुद्ध कारवाई की गई। इस मौके पर मौलाना तौफ़ीक़ क़ादरी,इलियास मज़ीद, एस अली, मतिउर्रह्मान, ज़फ़र कमाल, मो खलील, गयासुद्दीन मुन्ना, हाजी नवाब, ज़ाहिद काजल, साजिद उमर, मो मून, हैदर अली, मो अफ्फान, मो अख्तर, मोहम्मद सलाहुद्दीन, नूर हसन,शम्स कमर लड्डन, मोहम्मद परवेज़, मोहम्मद अख़्तर, मोहम्मद शाहिद, मो मुस्तकीम आदि मौजूद थे।

बैठक में यह मांग किया गया
अल्पसंख्यकों विशेष कर मुसलमानों की बुनियादी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस एवं कारगर कदम उठाया जाए। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त निगम वक्फ बोर्ड, मदरसा

बोर्ड उर्दू अकादमी जैसी संवैधानिक ईकाईयों का गठन अति शीघ्र किया जाए।

राज्य में गठित होने वाले बोर्ड, निगम, बीस सूत्री समितियों आयोग आदि जैसी संस्थाओं में अल्संख्यकों

#को आबादी के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व दी जाए। झारखंड में बुनकरों एवं कारीगरों की स्थिति अत्यंत खराब है इसलिए बुनकरों एवं पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम एवं योजनाओं को सुचारू रूप से चलाया जाए। बुनकरों की दुनियादी समस्याओं का समाधान हो एवं उन्हें सब्सिडी और अनुदान राशि दी जाए। #

मुस्लिम अल्पसंख्यकों के रोजगार, शिक्षण, प्रशिक्षण रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण एवं विकास के लिए

विशेष कार्यक्रम चलाएं जाएं।

# झारखंड में सच्चर समिति एवं रंगनाथ समिति की अनुशंसाओं को लागू कर कार्यान्वित की जाए।

# # मुस्लिम छात्राओं के बुर्के पर फिर विवाद, हिन्दू युवा नेताओं ने की प्रतिबंध  की मांगमुस्लिम छात्र-छात्राओं के लिए झारखंड के हर जिला मुख्यालय में छात्रावास का निर्माण कराया जाए। राजधानी रांची स्थान चिन्हित एवं आवंटित कर साहित्यक गतिविधियों के लिए गालिब भवन का निर्माण कराया जाए।

# मौलाना आजाद द्वारा निर्मित मदरसा इस्लामिया रांची का भवन एक सौ वर्षों से ज्यादा पुराना हो चुका है। एवं भीड़ वाले व्यवसायिक क्षेत्र में होने के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। अतः मौलाना आजाद के यादगार शिक्षा एवं सांस्कृतिक केंद्र के लिए पांच एकड़ जमीन चिन्हित कर सरकारी भूमि आवंटित की जाए।

# झारखंड राज्य में स्थित वक्फ भूमि, संपत्ति एवं अंशदान से प्राप्त राशि का पार्दर्शितापूर्ण व्यापक समाज

हित में उपयोग हो। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता, स्थायीकरण एवं वित्तीय सहायता और यथासमय वेतन भूगतान किया जाए। #

# राज्य में मुसलमानों को प्रताड़ित करने वाली घटनाओं की न्यायिक जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

# झारखंड राज्य में भी मोबलिंचिंग के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाए। मजलिस मांग करती है कि उपरोक्त सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर जल्द से जल्द कार्रवाई की !

Report By :- ADITI PANDIT, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

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