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झारखंड में एक बार फिर आदिवासी अस्मिता, धार्मिक पहचान और अधिकारों की रक्षा को लेकर आवाज बुलंद हो गई है. विभिन्न आदिवासी संगठनों ने ‘आदिवासी बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले आज झारखंड बंद का आह्वान किया है. यह बंद न सिर्फ धार्मिक स्थलों की रक्षा की मांग को लेकर बुलाया गया है, बल्कि इसे वर्तमान राज्य सरकार की कथित आदिवासी विरोधी नीतियों के विरुद्ध एक निर्णायक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है. बंद को सफल बनाने के लिए संगठनों ने 3 जून की शाम राजधानी रांची सहित विभिन्न जिलों में मशाल जुलूस निकालकर जनसमर्थन की अपील की. रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाले गए इस जुलूस में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए. हाथों में जलती मशालें, पारंपरिक नारों और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ यह जुलूस निकाला गया.
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
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बंद का मुख्य उद्देश्य झारखंड में स्थित कई पारंपरिक और पवित्र आदिवासी स्थलों को बचाना है, जो विकास कार्यों या सरकारी परियोजनाओं के कारण खतरे में बताए जा रहे हैं. इनमें मरांग बुरू (दुमका), पारसनाथ हिल्स (गिरिडीह), लुगु बुरू (बोकारो), मुधर हिल्स (पिठोरिया), दिउरी दिरी (तमाड़) और बेड़ो महदानी सरना स्थल प्रमुख हैं.
इन स्थलों को आदिवासी समुदाय न सिर्फ धार्मिक रूप से पूज्य मानता है, बल्कि इन्हें उनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का केंद्र भी माना जाता है. आदिवासी संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा इन स्थलों पर विकास के नाम पर जो गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, वे सीधे तौर पर उनकी धार्मिक भावनाओं और परंपराओं पर आघात कर रही हैं.
फ्लाईओवर विवाद बना आंदोलन का प्रतीक
रांची के डोरंडा-सिरमटोली फ्लाईओवर का रैंप निर्माण विवाद इस आंदोलन का प्रतीक बनकर उभरा है. स्थानीय आदिवासी समुदाय का कहना है कि इस फ्लाईओवर के रैंप से न सिर्फ उनकी बस्ती प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके पारंपरिक पूजा स्थल भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. इसके विरोध में पहले भी प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक समाधान न मिलने पर अब इसे राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना दिया गया है.

बैठक के बाद बाद निकाला गया मशाल जुलूस
रांची में ‘आदिवासी बचाओ मोर्चा’ की एक महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाए गए. बैठक में वक्ताओं ने हेमंत सोरेन सरकार को ‘आदिवासी और मूलवासी विरोधी’ करार दिया और कहा कि इस सरकार ने आदिवासी हितों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार आदिवासी समुदाय की मांगों को नहीं मानती और धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए ठोस नीति नहीं लाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मोर्चा के नेताओं ने यह तक कह दिया कि अगर आवश्यकता पड़ी, तो वे सरकार को सत्ता से बेदखल करने तक संघर्ष जारी रखेंगे.
सहयोग की अपील, आंदोलन को सर्वजन बनाने की कोशिश
बंद को सफल बनाने के लिए आदिवासी संगठनों ने न सिर्फ अपने समुदाय से, बल्कि राज्य के अन्य सामाजिक, धार्मिक और स्वदेशी संगठनों से भी समर्थन की अपील की है. मशाल जुलूस के दौरान जारी बयानों में कहा गया कि यह लड़ाई केवल आदिवासियों की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की अस्मिता से जुड़ी है. मोर्चा की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि 4 जून को होने वाला झारखंड बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन इसका उद्देश्य सरकार तक एक सशक्त और संगठित संदेश पहुंचाना है. बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी गतिविधियों को ठप रखने की अपील की गई है.
पूर्व संघर्षों की स्मृति और भविष्य की रणनीति
झारखंड राज्य का इतिहास आदिवासी आंदोलनों से भरा रहा है. चाहे वह बिरसा मुंडा का उलगुलान हो या 90 के दशक का झारखंड अलग राज्य आंदोलन, हर बार आदिवासी समुदाय ने संगठित होकर अपनी बात रखी है. इस बार भी संगठनों का दावा है कि यह सिर्फ एक बंद नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए चेतावनी है.
आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर नेताओं ने संकेत दिया कि अगर सरकार मांगें नहीं मानती, तो राज्यभर में धरना-प्रदर्शन, पदयात्रा और सामाजिक बहिष्कार जैसे कदम उठाए जाएंगे. इसके साथ ही वे न्यायालय की शरण में जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. मौके पर आदिवासी नेता गीता श्री उरांव और फूलचंद तिर्की ने कहा कि बंद ऐतिहासिक होगा और अब आर पार की लड़ाई होगी.
सिरमटोली-मेकॉन फ्लाईओवर का उद्घाटन जल्द होने की उम्मीद
इधर सिरमटोली-मेकॉन फ्लाईओवर का उद्घाटन जल्द होने की उम्मीद जतायी गई है. इसे लेकर पथ निर्माण विभाग और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच मंथन जारी है. बताया गया कि निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियरों ने उद्घाटन की तिथि रातू रोड फलाईओवर से पहले 8 जून या 14 जून को करने का प्रस्ताव दिया गया है. 372 करोड़ रुपये की लागत से 2.34 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया गया है. इस फ्लाईओवर के चालू होने से सिरमटोली से डोरंडा तक 20 मिनट का सफर 3-4 मिनट में पूरा होगा. फलाईओवर निर्माण का काम अगस्त 2022 में शुरू हुआ था और निर्माण कार्य अब पूरा हो गया है. हालांकि फलाईओवर के नीचे पटेल चौक व निवारणपुर में सर्विस रोड का काम अभी भी जारी है.

Report By :- PALAK TIWARI, CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI