इमारत ए शरिया में बड़ी टूट : झारखंड हुआ अलग, मौलाना नजर तौहीद चुने गए पहले अमीर ए शरीयत, रांची के मुसलमानो ने मौलाना नज़र तौहीद को अमीर मानने से किया इनकार
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अमीर ए शरीयत के पद पर मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी का जो चुनाव हुआ वह इमारत के संविधान के खिलाफ हुआ
मांडर में आयोजित मजलिस में वहां मौजूद लोगों ने मौलाना नज़र तौहीद को अमीर मानने से इनकार कर दिया
झारखंड के पहले अमीर ए शरीयत बनने की सूचना मिलने के बाद फुलवारी शरीफ स्थित कार्यालय में हलचल मच गई
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102 साल पुरानी इमारत ए शरिया बिहार झारखंड और उड़ीसा में बड़ी टूट हो गई झारखंड ने अपने को इस संस्थान से अलग कर लिया यही नहीं इस्लामिक स्कॉलर मौलाना नजर तौहीद मजहरी को पहला अमीर ए शरीयत चुन लिया गया, मौलाना मजहरी 30 साल से इमारत से जुड़े हुए हैं रांची से 10 किलोमीटर दूर मांडर में मजलिसे उलेमा झारखंड का इजलास था इसी में सर्व समिति से मौलाना मजहरी को झारखंड का पहला अमीर ए शरीयत चुन लिया गया अमीर बनने के बाद मौलाना मजहरी ने पद और गोपनीयता की शपथ भी ले लिया,
102 साल पहले यानी 1921 में हजरत मौलाना अबुल मोहसिन मोहम्मद सज्जाद ने इमारत ए शरिया की स्थापना की थी पटना के पत्थर की मस्जिद में हुई बैठक में इस संस्था की स्थापना की गई थी, इसमें भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद समेत देश के कई मुस्लिम स्कॉलर, सामाजिक और धार्मिक लोग शामिल हुए थे, 1921 में बिहार, झारखंड और उड़ीसा एक एक राज्य था इसलिए इसका नाम इमारत ए शरिया बिहार, उड़ीसा और झारखंड रखा गया, झारखंड में मुसलमान की आबादी करीब 75 लाख है जबकि बिहार में मुसलमान की आबादी 2. 31 करोड़ है !

झारखंड के साथ होता रहा है सौतेलापन
मौलाना नजर तौहीद झारखंड के चतरा के रहने वाले हैं वह मदरसे में शिक्षक है मौलाना नजर तोहिद ने नेशन एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कहा कि झारखंड के साथ सौतेलापन होता था मैं 30 साल से इस संस्था से जुड़ा हुआ हूं कई बार इस राज्य के लिए इमारतें के प्रमुखों के समक्ष अपनी बात रखी पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया, अमीर ए शरीयत के पद पर मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी का जो चुनाव हुआ वह इमारत के संविधान के खिलाफ हुआ मौलाना नजर तौहीद ने कहा कि झारखंड में बहुत काम है बिहार से यह नहीं हो पा रहा था इसलिए झारखंड को मजबूरी में अलग करना पड़ा,!

इमारत को कमजोर करने की कोशिश की गई मौलाना शिबली
झारखंड के पहले अमीर ए शरीयत बनने की सूचना मिलने के बाद फुलवारी शरीफ स्थित कार्यालय में हलचल मच गई, इधर इमारत ए शरिया बिहार, उड़ीसा झारखंड के कार्यवाहक नाजिम मौलाना शिबली अल कासमी ने कहा कि मौलाना नजर तोहिद ने इमारत को कमजोर करने की कोशिश की है, ऐसा कुछ नहीं है इमारत एक था एक है और एक रहेगा, मांडर में आयोजित मजलिस में वहां मौजूद लोगों ने मौलाना नज़र तौहीद को अमीर मानने से इनकार कर दिया !
Report By :- SHWETA JHA, NEWS DESK, NATION EXPRESS, RANCHI