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यह विवाद सरकार और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच टकराव का नया अध्याय बन सकता है। विधेयक पर संसद में होने वाली चर्चा और मतदान पर सभी की नजरें टिकी हैं।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. बोर्ड का मानना है कि यह विधेयक मुस्लिमों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाता है. विधेयक के विरोध में 5 करोड़ से ज्यादा ईमेल भेजे गए हैं, लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया.
संसद में पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने जोरदार विरोध जताया है। बोर्ड ने मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक पारित हुआ तो मुसलमान देशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे। उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। प्रेस को इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजल रहीम मुजद्ददी, प्रवक्ता डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास, पूर्व सांसद व सदस्य मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मोहम्मद अदीब संबोधित कियामुख्य आपत्तियां: संविधान और भेदभाव का सवाल
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AIMPLB के अनुसार, यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार सुनिश्चित करते हैं। बोर्ड ने आरोप लगाया कि यह विधेयक भाजपा के “साम्प्रदायिक एजेंडे” का हिस्सा है, जो मुसलमानों को “द्वितीय श्रेणी का नागरिक” बनाना चाहता है। उन्होंने कहा, “हिंदुओं और अन्य धार्मिक समूहों के पास अपने धार्मिक स्थलों और संपत्तियों का प्रबंधन करने का अधिकार है, लेकिन मुसलमानों को यह अधिकार छीना जा रहा है।”

जेपीसी की भूमिका और विवाद
इससे पहले, विपक्ष के विरोध के बाद इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया था। JPC ने मुस्लिम समुदाय और अन्य हितधारकों से राय मांगी। AIMPLB के मुताबिक, मुस्लिमों की बहुलता ने इसे “भेदभावपूर्ण और संविधान-विरोधी” बताकर खारिज कर दिया, जबकि कुछ गैर-संबंधित संस्थाओं ने सरकार के पक्ष में राय दी। अंततः, JPC ने कुछ “मामूली संशोधनों” के साथ रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी, लेकिन AIMPLB का कहना है कि यह संशोधन और भी “कठोर और विवादास्पद” बन गया है।
मीडिया और सरकार पर गुमराह करने का आरोप
बोर्ड ने सरकार और मीडिया पर “झूठी जानकारी फैलाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधेयक में महिलाओं की भागीदारी, न्यायालय में अपील जैसे प्रावधान पहले से मौजूद हैं, और इन्हें “नए सुधार” के रूप में पेश कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। AIMPLB ने जनता से अपील की कि वे विधेयक को स्वयं पढ़कर राय बनाएं।

विवादास्पद बिंदु: क्या बदलाव चाहती है सरकार?
- वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की अनिवार्यता: धारा 40 के तहत वक्फ बोर्ड के सदस्यों और CEO के लिए “मुस्लिम होने” की शर्त हटाई जा रही है। इसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।
- सरकार का नियंत्रण: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार सरकार या उसकी नियुक्त संस्था को मिलेगा।
- ट्रिब्यूनल की जगह सरकारी अधिकारी: वक्फ विवादों का निपटारा अब सरकारी अधिकारी करेंगे, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवादों
AIMPLB की मांग: विपक्ष और जनता से समर्थन
बोर्ड ने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों और सांसदों से इस विधेयक का विरोध करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसे पारित किया गया, तो वे संवैधानिक, कानूनी और जनआंदोलन के माध्यम से विरोध जारी रखेंगे। AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, “वक्फ में सुधार की जरूरत है, लेकिन यह विधेयक भ्रष्टाचार रोकने के बजाय मुस्लिम अधिकारों को कुचलने का औजार है।”
AIMPLB की मुख्य बातें…
भाजपा मुसलमानों को बनाना चाहती है दूसरे दर्जे का नागरिक
संविधान vs वक्फ बिल: AIMPLB ने घोषित किया देशव्यापी आंदोलन का एलान
वक्फ ट्रिब्यूनल हटाकर सरकारी अधिकारी ! न्यायिक स्वायत्तता पर हमला
भाजपा सरकार vs मुस्लिम अधिकार: वक्फ बिल को लेकर टकराव की नई चिंगारी
मीडिया वक्फ बिल को लेकर झूठ फैलाकर जनता को गुमराह किया
JPC को बताया धोखा
AIMPLB ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) पर भी गंभीर आरोप लगाए. मोहम्मद फजुलर्रहीम ने कहा, “JPC ने मामला और बिगाड़ दिया है. एक सरकारी अधिकारी को शामिल करने से वह हमेशा सरकार के पक्ष में ही फैसला देगा. JPC पूरी तरह से एक धोखा और फरेब है.”
सरकार से बिल वापस लेने की मांग
AIMPLB ने इस बिल को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया और सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की एक साजिश है, जिससे मुस्लिम समाज को बड़ा नुकसान होगा.
‘विरासत के हक को किया जा रहा खत्म’
उन्होंने आगे कहा,’इसमें एक और नियम है कि वक्फ का क्रिएशन प्रैक्टिसिंग मुसलमान ही कर सकता है। अब सरकार कैसे तय करेगी की कौन सा शख्स प्रैक्टिसिंग मुसलमान है या नहीं। सरकार ने हमारे सुझावों को नहीं माना। मुस्लिमों से वक्फ की वयवस्था ले ली गई है। विरासत के हक को खत्म किया जा रहा है।

Report By :- PALAK TIWARI, NATIONAL DESK, NATION EXPRESS, RANCHI