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प्लान तैयार… टारगेट सेट ! सुदेश महतो को जान से मरने की रची गई थी खौफनाक साज़िश ! PLFI के बड़े नक्सली कमांडरों ने गुप्त बैठक में तैयार हुआ था PLAN

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CITY DESK, NATION EXPRESS, RANCHI

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को लेकर खुफिया एजेंसियों ने जो जानकारी साझा की है उससे झारखंड की सियासत में भूचाल आ गई है. सुदेश महतो पीएलएफआई नक्सली मार्टिन केरकेट्टा के रडार पर थे, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम था. इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण था या कुछ और, यह अभी पता नहीं चल पाया है. मार्टिन केरकेट्टा की हत्या के बाद सुदेश महतो खतरे से दूर हो गए हैं

क्या आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की जान खतरे में है? कौन है वो जो उन्हें जान से मारना चाहता है। क्यों नक्सलियों की लिस्ट में है सुदेश महतो का नाम? इन सवालों ने झारखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को लेकर खुफिया एजेंसियों ने जो जानकारी साझा की है, वो चौंकाने वाली है। PLFI के 15 लाख के इनामी नक्सली मार्टिन केरकेट्टा की रडार पर सुदेश महतो थे। दो दिन पहले गुमला में हुए एनकाउंटर में मार्टिन के मारे जाने के बाद इस सनसनीखेज साजिश का खुलासा हुआ है। दिन था 25 जनवरी 2023… जगह थी रांची का जोन्हा जंगल। यहां PLFI के बड़े नक्सली कमांडरों की एक गुप्त बैठक हुई थी। मीटिंग में मार्टिन केरकेट्टा, तिलकेश्वर गोप, सूरज गोप और मोटू जैसे नाम शामिल थे, और मकसद था सुदेश महतो को खत्म करना। प्लान तैयार हुआ। टारगेट सेट किया गया। और तय कर लिया गया कि झारखंड की राजनीति में प्रभावशाली चेहरों में से एक सुदेश महतो को मिटा देना है। लेकिन समय रहते खुफिया एजेंसियों को इस साजिश की भनक लग गई। पुलिस ने समय रहते छापेमारी की। इस कार्रवाई में तिलकेश्वर गोप और सूरज गोप को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि मार्टिन और मोटू फरार हो गए। तिलकेश्वर ने पूछताछ में सब उगल दिया, उसने बता दिया कि सुदेश महतो नक्सलियों के निशान पर थे। मार्टिन केरकेट्टा के मारे जाने के बाद फिलहाल कहा जा रहा है कि सुदेश महतो अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन PLFI की मानसिकता और नेटवर्क को देखते हुए अभी भी उनको सतर्क रहने की ज़रूरत है।

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उग्रवा* दियों की हिटलिस्ट में सुदेश महतो, AJSU ने की उच्चस्तरीय जांच और  सुरक्षा समीक्षा की मांगअब सबसे बड़ा सवाल ये है कि सुदेश महतो को मारने की ये खौफनाक साजिश क्यों रची जा रही है। क्या ये सिर्फ नक्सली दुश्मनी थी या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश छुपी है? खुद खुफिया विभाग भी इस सवाल का ठोस जवाब नहीं दे पा रहा। क्या ये हमला सिर्फ नक्सली था या किसी ने उन्हें इस्तेमाल किया? क्या कोई अंदरूनी साजिश सुदेश महतो के खिलाफ चल रही है? दरअसल ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब सुदेश महतो को टारगेट किये जाने की साजिश रची गई हो इससे पहले भी उनको मारने की साजिश रची जा चुकी है। 2014 में सुदेश कुमार महतो को जनवरी और फरवरी महीने में दो बार मारने की कोशिश की गई, लेकिन नक्सली इसमें विफल रहे। उस समय भी इस मामले को लेकर कई नक्सली गिरफ्तार हुए थे।

The Followup on X: "सुदेश महतो को मारने की थी गहरी साजिश, नक्सलियों के निशाने  पर थे क्या आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की जान खतरे में है? कौन है वो जो ...तब उनलोगों ने बताया था कि उग्रवादियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि सुदेश महतो की हत्या का पहला प्रयास 27 और 28 जनवरी 2014 को सिल्ली में आयोजित प्रतिभा दर्शन महोत्सव में किया गया था। दोनों दिन जीतन पातर मुंडा उर्फ प्रशांत अपने साथ एक काले बैग में शक्तिशाली टाइमर बम लेकर पहुंचा था। सुदेश के साथ वह मंच पर पर भी चढ़ा, लेकिन साइज बड़ा होने के कारण बम को कहीं लगा नही सका। बाद में इस बम को रांची पुलिस ने सोनाहातू में डिफ्यूज किया था। लगातार दो दिनों के असफल प्रयास के बाद उसने दूसरी योजना पर काम करना शुरू किया था। दूसरा प्रयास 26 फरवरी को किया जाना था। इस दिन शाम को सुदेश जोन्हा में एक शादी समारोह में शामिल होने वाले थे। जैसे ही उनके अंगरक्षक भोजन करने जाते सुदेश पर हमला किया जाना था। पर, इस घटना के एक घंटे पहले ही उग्रवादियों को अनगड़ा पुलिस ने पकड़ लिया था। गिरफ्तार आरोपियों में पीएलएफआइ के राची पूर्वी का जोनल कमाडर प्रशांत जी उर्फ जीतन पातर मुंडा व संजय पातर मुंडा शामिल था।

एनकाउंटर में मारा गया कुख्यात उग्रवादी मार्टिन केरकेट्टा, 15 लाख रुपये रखा गया था इनाम

आखिर क्यों PLFI के निशाने पर थे आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, कुख्यात मार्टिन  केरकेट्टा के मारे जाने के बाद हुआ खुलासा | Jharkhand & Bihar Local News |  THENEWSPOST.inप्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) का शीर्ष आतंकवादी मार्टिन केरकेट्टा पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ में मारा गया। गुमला के एसपी ने बताया कि केरकेट्टा पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस टीमों को कामडारा इलाके में उसके मौजूद होने की सूचना मिली थी। जब पुलिस वहां पहुंची, तो उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पुलिस टीमों पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। उसके पास से एक पिस्तौल बरामद की गई है। 

एसपी ने योगदान देते ही केरकेट्टा के पीछे लगा दिया था खुफिया तंत्र

उधर, एसपी हरीश बिन जमां ने जैसे ही गुमला में योगदान दिया, उन्होंने मार्टिन केरकेट्टा के दस्ते के बारे में पता करने के लिए खुफिया तंत्र को लगा दिया. इसलिए मंगलवार की रात जैसे ही एसपी को सूचना मिली. तुरंत पुलिस की टीम का गठन कर मार्टिन को मुठभेड़ में मार गिराया.

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