CRIME DESK, NATION EXPRESS, कानपुर
किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजे गए रिटायर्ड इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी के काले कारनामे अब सामने आ रहे हैं। जिस घर में उसने दुष्कर्म किया, वह उसका नहीं बल्कि किसी और का है। घर के मालिक ने प्रभाव में आकर उसे कुछ दिन ठहरने का मौका दिया था और उसका सिला यह मिला कि उसने मकान कब्जा लिया। मकान मालिक ने विरोध किया तो वर्दी का रौब दिखाते हुए एक के बाद एक मुकदमा दर्ज कराकर उसकी जिंदगी तबाह कर दी। मकान मालिक से बात की तो बरबादी का किस्सा सुनाते-सुनाते वह फूट फूट कर रोने लगा।
फ्रेंड्स कालोनी स्थित जिस मकान में दुष्कर्म की वारदात हुई, वह भी विवादित है।
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कानपुर देहात के सिकंदरा थाना क्षेत्र के गर्दई खुर्द निवासी शिव सिंह यादव वायुसेना में सार्जेंट थे। शिव सिंह के मुताबिक उन्होंने यह मकान खरीदा था। वर्ष 1998 की बात है तत्कालीन चकेरी इंस्पेक्टर रहे दिनेश त्रिपाठी से उनकी जान पहचान हुई तो घर आना-जाना हुआ। कई बार वह घर पर ही रुक जाते। इसके बाद दिनेश ने मकान पर कब्जे की कोशिशें शुरू कर दीं। कभी किराएदार बनकर तो कभी सेल डीड पेश करके वह मकान पर अपना अधिकार जताने लगे।
विरोध पर तीन दिन अवैध तरीके से हिरासत में रखकर मारा पीटा गया और फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद ही मुकदमों की झड़ी लग गई। शिव सिंह का दावा है कि साढ़े नौ किलो चरस के साथ उसकी गिरफ्तारी में भी दिनेश त्रिपाठी का हाथ था। रोते हुए उन्होंने बताया कि कोर्ट का फैसला उनके पास है, इसके बाद भी अपने मकान में कदम नहीं रख सकते। टूटे फूटे मकान में रह रहे हैं। इन्हीं समस्याओं के चलते नौकरी भी छोडऩी पड़ी। एनडीपीएस के मामले में वारंट पर हाजिर न होने के चलते वह ढाई साल से जेल में ही थे। चार दिन पहले ही जमानत पर छूटे हैं।
किस्से यह भी हैं मशहूर
-चकेरी में तैनाती के दौरान एक बदनाम होटल में रहते थे। इस पर भी कई बार शिकायतें हुईं।
-कांग्रेस नेता संजीव अवस्थी को नकली नोट रखने के आरोपों में फंसाया। बाद में जांच हुई तो उल्टे मुकदमा दर्ज हो गया। इसी मामले में जेल जाना पड़ा।
संजीव अवस्थी के प्रकरण में मुकदमा दर्ज होने के एक साल तक फरार रहा। इस दौरान एसएसपी कार्यालय में ही एसएसपी के तत्कालीन पीआरओ द्वारा पैर छूए जाने की फोटो सामने आने के बाद पुलिस की भारी किरकिरी हुई थी।
अपने रिश्तेदार एसके त्रिपाठी के साथ टीचर्स हाउसिंग सोसायटी के माध्यम से चकेरी में जमीन की खरीद-फरोख्त का काम करके करोड़ों कमाए। बताते हैं कि इस सोसायटी में कई नामी लोगों की संपत्तियां भी हैं, जिन्होंने यहां अपना काला धन खपाया था।
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अमर सिंह, अमिताभ बच्चन के खिलाफ जो दिनेश त्रिपाठी ने दर्ज कराया था, उसका वादी एसके त्रिपाठी ही था।
– पुलिस की नौकरी में होते हुए भी एक बड़े नेता को चुनाव लड़वाने पूरे दलबल के साथ जाता था। सत्ता पक्ष के भी एक बड़े नेता से करीबी संबंध रहा।
– फजलगंज में थानेदारी के वक्त एक प्लाट पर कब्जा कर लिया था। बाद में यह प्लाट बेच दिया।
यह मामला भी हुआ था चर्चित
दिनेश त्रिपाठी से जुड़ी टीचर्स हाउसिंग सोसायटी के खिलाफ सपा विधायक अभय सिंह ने वर्ष 2016 में शिकायत की थी। बाद में यह जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। हालांकि आश्चर्यजनक रूप से विधायक ने शिकायत यह कहते हुए वापस ले ली थी कि उन्होंने शिकायत की ही नहीं। उनके फर्जी हस्ताक्षर से शिकायत की गई।
निलंबन के दौरान ही हुआ रिटायर
कानपुर नगर से दिनेश त्रिपाठी का तबादला कानपुर देहात हुआ। अकबरपुर कोतवाली में वह लंबे समय तक जमा रहा। यहां भी जमीनी विवाद में नाम आया। यहां से झांसी तबादला हुआ तो वह रिलीव तो हो गया, लेकिन ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। इस पर निलंबित हुआ और निलंबन में ही रिटायर हो गया।
Report By :- MANISHA SINGH, CRIME DESK, NATION EXPRESS, कानपुर