अलविदा-अलविदा माहे रमजान अलविदा: आखिरी जुमा आज : तैयारियां पूरी, माहे-रमज़ान का अलविदा जुमा है बहुत ख़ास
NEWS DESK, NATION EXPRESS, NEW DELHI
इस्लाम में माह-ए-रमजान (Mah-e-Ramzan) में पड़ने वाले आखिरी जुमा को अलविदा जुमा (Alvida Jumma) कहते हैं। मान्यता है कि रमजान (Ramzan) के तीसरे और आखिरी अशरे में की गई इबादत रोजेदारों को जहन्नुम की आग से बचाती है। इस अशरे में जो आखिरी जुमा आता है उसे अलविदा जुमा कहते हैं।
आज ‘अलविदा’ यानी रमजान (Ramzan/Ramadan) का आखिरी जुमा है. रमज़ान में पड़ने वाले इस आखिरी जुमा को ‘अलविदा जुमा’ (Alvida Jumma) कहते हैं. अलविदा का खास महत्व और दर्जा है. इस दिन को दुनिया भर के मुसलमान पूरी अजमत अकीदत से और अल्लाह (Allah) की इबादत (Worship) करके गुजारते हैं. यह जुमा अन्य जुमा के मुकाबले इसलिए खास है क्योंकि यह रमजान के महीने का आखिरी जुमा यानी शुक्रवार है और इस साल के बाद रमजान में कोई और जुमा नहीं पड़ेगा. वहीं अलविदा का मतलब रमजान के पाक महीने का समाप्त होना यानी इसकी विदाई है. यही वजह है कि इसे अलविदा कहते हैं और इसकी नमाज भी काफी अहम मानी जाती है. इस्लाम में अलविदा को सबसे अफजल करार दिया गया है.
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रमज़ान का आखिरी जुमा कई मायनों में ख़ास है. एक तो इसके आने का मतलब यह है कि अब बस ईद आने ही वाली है. यानी ईद के चांद से पहले का यह आखिरी जुमा है. वहीं इबादत के लिहाज़ से भी यह दिन मुसलमानों के लिए बेहद ख़ास है. इस दिन मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और इस बात का शुक्र अदा करते हैं कि उन्हें माहे रमज़ान के पाक महीने में रोज़े रखने का मौका मिला. तरावीह पढ़ने और अल्लाह की इबादत करने का सम्मान हासिल हुआ.

अलविदा की नमाज हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है। इस दिन कुछ मुसलमान नए कपड़े पहन कर अपने रब की इबादत करते हैं। अलविदा को छोटी ईद भी कहते हैं। खुद अल्लाह ने पवित्र कुरआन शरीफ में इस दिन को मुसलमानों के लिए खास फरमाया है। अलविदा जुमा की नमाज दुनिया के हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है। इस दिन लोग रब की इबादत में अपना ज्यादा समय बिताते हैं। कहा जाता है कि अलविदा जुम्मा की नमाज के बाद सच्चे दिल से अगर अल्लाह से कोई फरियाद की जाए तो अल्लाह बंदे की हर जायद दुआ कुबूल करते हैं और उनके गुनाहों को माफ करते हैं।
