Monsoon Child Care Tips : रांची में बारिश और जलजमाव के बीच शहर में डेंगू और स्वाइन फ्लू का खतरा : बारिश के मौसम में बच्चों को अक्सर हो जाती हैं ये परेशानियां, जानें कैसे रखें ख्याल
HEALTH DESK, NATION EXPRESS, RANCHI
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज ने कहा कि मौसमी बुखार व उल्टी-दस्त के मरीज अधिक आ रहे हैं। इधर, पीलिया डेंगू-स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा है। ऐसे में बीमारी से बचने के लिए लोग पानी उबालकर ठंडा करने के बाद पीएं और बच्चों को भी वही पानी पिलाएं। बासी भोजन अथवा खुले में रखा खाना व कटे फल आदि न खाएं।
हेल्थ अलर्ट:शहर में डेंगू-स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, दो नए मरीज मिले
बच्चों को हो बुखार तो तत्काल ले जाएं अस्पताल
मौसम बदला तो अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड खचाखच हो गया
बच्चों को बिल्कुल भी बारिश में ना भीगने दे
अगर छोटे बच्चे को फीवर और खांसी और सर्दी होती तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
इस महीने बच्चों को बाहर के खाना खिलाने से परहेज करें
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बीच-बीच में हो रही बारिश और जलजमाव के बीच शहर में डेंगू और स्वाइन फ्लू का खतरा बरकरार है। रिम्स में सोमवार को एक और डेंगू मरीज भर्ती के साथ भर्ती होने के साथ डेंगू पीड़ितों की संख्या छह हो गई है। वहीं शिशु रोग विभाग में भर्ती 11 साल के एक बच्चे में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डेंगू और स्वाइन फ्लू पीड़ित में मौसमी बीमारी के लक्षण थे।
खांसी और बुखार की शिकायत के बाद इनके लक्षणों को देखते हुए आइसोलेशन विभाग में रखा गया था। इधर, राजधानी में डेंगू के लार्वा मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए विभिन्न इलाकों से जांच सैंपल लेकर रिम्स भेजना शुरू कर दिया है। सोमवार को 12 सैंपल रिम्स में आए, जिसकी जांच मंगलवार को की जाएगी।
नगर निगम अलर्ट, 5 गाड़ियाें से कराई जा रही काेल्ड और थर्मल फाॅगिंग
रिम्स में 6 डेंगू पीड़ितों के भर्ती होने के बाद नगर निगम ने जलजमाव खत्म करने और डेंगू के लार्वा मारने का अभियान तेज कर दिया है। शहर में फाॅगिंग शुरू कर दी गई है। अभी काेल्ड फाॅगिंग की 3 और थर्मल फाॅगिंग की 2 मशीनें अलग-अलग वार्डाें में स्प्रे कर रही हैं। वहीं हर वार्ड में 5-5 हैंड स्प्रे की भी व्यवस्था की गई है।
माेहल्लाें में वैसे स्थान, जहां गाड़ियां नहीं जा सकती हैं, वहां हैंड स्प्रे का इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से प्रत्येक वार्ड में फाॅगिंग के लिए एक महीने का तिथिवार चार्ट बनाया गया है। सभी जाेन के सुपरवाइजर काे चार्ट उपलब्ध करा दिया गया है। नालियाें में सफाई के दाैरान चुना और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है
निगम प्रशासन बोला- फॉगिंग के लिए और खरीदेंगे
सहायक नगर आयुक्त शीतल कुमारी ने बताया कि फाॅगिंग और स्प्रे मशीन बढ़ाने के लिए पिछले कई माह से प्रयास किया जा रहा था। अब यह प्रक्रिया लगभग पूरी हाे चुकी है। जल्द ही फाॅगिंग के लिए और गाड़ियां खरीरी जाएंगी।
डेंगू से निपटने को आज बैठक करेगा निगम
डेंगे से निपटने के लिए शहर की सरकार मंगलवार को बैठक करेगी। बैठक में डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रहेगी। इसमें डेंगू के बढ़ते खतरे को खत्म करने, संभावित इलाकों में विशेष अभियान चलाने के साथ सैंपलिंग कार्य में तेजी लाने पर निर्णय लिया जाएगा।
सूचना मिलते ही साफ-सफाई हो रही
“डेंगू काे लेकर निगम पूरी तरह से अलर्ट है। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कहीं भी जलजमाव और गंदगी की सूचना मिल रही है ताे निगम की टीम तुरंत पहुंचकर सफाई कर रही है। फिलहाल 5 गाड़ियाें से फाॅगिंग कराया जा रहा है।” -शीतल कुमारी, सहायक नगर आयुक्त
Kids Health In Monsoon:
बरसात का मौसम तेज गर्मी और धूप से राहत के साथ अपने साथ कई बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस मौसम में इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर कौन से ऐसे रोग हैं जो मानसून के दौरान बच्चों को सबसे ज्यादा परेशान करते हैं और उनसे बचने के लिए आप क्या उपाय कर सकते हैं।
सर्दी और फ्लू-
बारिश के मौसम में सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी कई एयरबोन बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। यह खतरा उन लोगों को अधिक बना रहता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है हल्का बुखार, खांसी, गले में खराश, थकान, बॉडी पेन, रनिंग नोज इसके कॉमन लक्षण हो सकते हैं।
डेंगू और मलेरिया-
मानसून के दौरान मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी मच्छर के काटने से होने वाली कई बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। मच्छर के काटने से फैलने वाले इस वायरस में पेशेंट को तेज बुखार, अत्यधिक बॉडी पेन, उल्टी, जोड़ों में दर्द, थकान, चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं। इन रोगों से लड़ने के लिए व्यक्ति को खुद को हाइड्रेटेड रखना, पौष्टिक खाना खाना और पूरा आराम करने की जरूर होती है ताकि उसकी रिकवरी जल्द हो सके।
फंगल इन्फेक्शन-
मानसून के दौरान त्वचा उमस की वजह से बहुत ऑयली और नमी वाली हो जाती है। जिसकी वजह से त्वचा पर धूल और बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं। नतीजतन स्किन फंगल इंफेक्शन की चपेट में आने लगती है। एथलीट्स फुट, फंगल रिंगवॉर्म, फंगल नेल इंफेक्शन ऐसी ही कुछ स्किन से जुड़े फंगल इन्फेक्शन के नाम हैं। इस तरह की समस्या से बचने के लिए प्रॉपर हाइजीन मेंटेन करें, बच्चों को गीले कपड़े बिल्कुल न पहनने दें, शरीर को जितना हो सके साफ और सूखा रखें, किसी के साथ अपना टॉवेल, कपड़े शेयर न करें।
एलर्जी चेक करें-
इस मौसम में एलर्जी से बचने के लिए यह सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा ऐसे किसी खास पोलेंस या एलर्जंस से दूर रहें, जिससे उसे एलर्जी हो सकती हो। अगर आपको कोई रैश, रेडनेस जैसे कोई लक्षण नज़र आते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

बच्चों को प्रोटेक्ट करने के लिए अपनाएं ये उपाय-
नाखून की सफाई-
कभी भी बच्चों के हाथ के नाखून न बढ़ने दें। बच्चे अक्सर अपना हाथ अपने मुंह में डालते रहते हैं। बढ़े हुए नाखूनों में मैल इत्यादि इकट्ठा हो जाता है, जो बहुत सारे कीटाणुओं की वजह बनता है। ऐसे में बच्चे जब कभी मुंह में हाथ डालते हैं तो ये कीटाणु बच्चे के पेट में जाकर कई बीमारियों का खतरा बनते हैं।
बच्चों को सूती कपड़े पहनाएं-
मानसून सीजन में कभी धूप, कभी बारिश का आना-जाना लगा रहता है। इस मौसम में गर्मी और उमस की वजह से आने वाले पसीने से बच्चे को बचाए रखने के लिए बच्चों को सूती कपड़े पहनाएं। कपड़े ऐसे हों कि उनके पूरे शरीर को कवर करते हों। सूती कपड़े पसीने के रूप में निकलने वाले शरीर के टॉक्सिन को आसानी से सोख लेते हैं और शरीर से गंदगी को आसानी से दूर कर देते हैं।
इन बातों का भी रखें ध्यान-
-मानसून सीजन में फल, सब्जियां, दूध, नट्स का सेवन जरूर करें।
– बच्चों को हाइड्रेटेड रखने की कोशिश करें।
-बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं ताकि मच्छर या कीड़े न काट सके।
-साफ और सूखे कपड़े पहने।
-बाहर का जंक न खाएं।
-बार बार हाथ पैर धोएं।
-हाइजीन मेंटेन करें।
Report By :- PRITI PANDEY, HEALTH DESK, NATION EXPRESS, RANCHI