देश का सबसे बड़ा दीनी इदारा दारुल उलूम देवबंद गैर मान्यता प्राप्त, बजरंग दल ने की बुलडोजर चलवाने की मांग
NEWS DESK, NATION EXPRESS, सहारनपुर
HIGHLIGHTS
- दारुल उलूम देवबंद के पास मान्यता नहीं
- बगैर मान्यता के चल रहे 306 मदरसे
- सहारनपुर में मदरसा सर्वे का काम पूरा
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देश का सबसे बड़ा दीनी इदारा दारुल उलूम गैर मान्यता प्राप्त मिला तो अफसर भी हैरान रह गए। प्रशासनिक अफसरों ने सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
देश का सबसे बड़ा मदरसा ‘दारुल उलूम’ भी गैर मान्यता के संचालित हो रहा! इससे 4500 मदरसे संबद्धता रखते हैं
Darul Uloom Deoband : मदरसों के सरकारी सर्वे में देश का सबसे बड़ा दीनी इदारा दारुल उलूम देवबंद गैर मान्यता प्राप्त मिला है, लेकिन यह सोसायटी एक्ट-1988 के तहत पंजीकृत है। इसलिए इसे गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता है। इस संबंध में प्रशासन ने शासन को सर्वे संबंधी रिपोर्ट भेज दी है।
सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा कराए गए गैर सरकारी मदरसों के सर्वे का काम पूरा हो गया। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेज दी गई। जिले में मदरसों के सर्वे में विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद भी गैर मान्यता प्राप्त मिला है। जो मदरसे सरकार से अनुदान नहीं लेते उन्हें गैर मान्यता प्राप्त बताया गया है। जिनमें दारुल उलूम भी शामिल है। हालांकि इन्हें अवैध या गैर कानूनी नहीं कहा जा सकता है।
जिला अल्पसंख्यक अधिकारी भरत लाल गोंड ने बताया कि जनपद के सभी मदरसों का सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। दारुल उलूम देवबंद समेत 306 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं, जो सरकारी मदद नहीं लेते हैं। इनका उप्र मदरसा बोर्ड में पंजीयन नहीं है। इसलिए इन्हें सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलेगा। न ही इनके छात्रों को छात्रवृत्ति मिलेगी। हालांकि ये मदरसे गैर कानूनी नहीं, बल्कि सोसाइटी आदि में पंजीकृत हैं।
उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था धार्मिक पढ़ाई करा सकती है। इसी के तहत दारुल उलूम देवबंद संचालित है। इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
उधर, दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि दारुल उलूम सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत है। भारतीय संविधान में दी गई धार्मिक आजादी के तहत यहां धार्मिक और आधुनिक शिक्षा दी जाती है। पिछले 150 साल से अधिक से चल रहे इदारे ने कभी किसी भी सरकार से कोई अनुदान नहीं लिया। इसका सारा खर्च लोगों द्वारा दिए गए चंदे से चलता है।
156 साल पहले हुई थी स्थापना
दारुल उलूम देवबंद करीब 156 साल पहले स्थापित हुआ था और इसका सिर्फ 1866 के सोसाइटी एक्ट में रजिस्ट्रेशन है. यूपी मदरसा बोर्ड के अंदर दारुल उलूम रजिस्टर्ड नहीं है और ये मदरसा किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता से भी नही चल रहा है. सहारनपुर के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कहना है कि सहारनपुर के अंदर अब तक 306 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं. उन्होंने बताया कि गैर मान्यता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में अंतर सिर्फ यही है कि वह बिना किसी सरकारी सहायता के चल रहे हैं. इस मामले में 12 बिंदु शासन द्वारा निर्धारित किए गए थे. उन्हीं बिंदुओं पर जांच की गई है. उन्होंने बताया कि मदरसों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है. इन मदरसों पर जो भी कार्रवाई करनी होगी, उसका निर्णय शासन अपने स्तर पर करेगा.
बजरंग दल ने बुलडोजर चलवाने की मांग
दारुल उलूम समेत कई मदरसों के गैर मान्यता प्राप्त होने की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के पश्चिमी प्रान्त प्रमुख विकास त्यागी ने दारुल देवबंद को लेकर फिर से विवादित बयान दिया है. विकास त्यागी का आरोप है कि दारुल उलूम के साथ-साथ जो अन्य मदरसे हैं और जो गैर मान्यता प्राप्त हैं .उन सब को विदेशों से और संदिग्धों से सारी फंडिंग होती है. जिसकी जांच होनी चाहिए. विकास त्यागी ने यह भी कहा दारुल उलूम पर बुलडोजर की कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए.
Report By :- AFSHA ANJUM, NEWS DESK, NATION EXPRESS, सहारनपुर